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मुन्नवर के बाद अब परवेज आखिर कब थमेगी देश के साथ यह नमकहरामी ?

प्रवीण दुबे

इसे भारत का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि यहां एक धर्म विशेष से जुड़े लोग लगातार साम्प्रदायिक माहौल ख़राब करने के षडयंत्र में जुटे हुए हैं। सबसे ज्यादा शर्मनाक बात तो यह है कि इस धर्म विशेष से ताल्लुकात रखने वाले विविध क्षेत्रों की तमाम नामचीन हस्तियों ने अपने अपने मंच से इस देश की गंगा जमुनी संस्कृति को लांछित करने का काम लगातार जारी रखा हुआ है। ताजा घटनाक्रम में कानपुर के कव्वाल परवेज द्वारा मध्यप्रदेश के रीवा में एक कार्यक्रम के दौरान “हिंदुस्तान का पता ही नहीं चलेगा कहां पर बसा था और कहां पर था” जैसी तेजाबी जुबान का इस्तेमाल किया गया है। इससे पहले भी देश ने इसी धर्म विषेष के एक कथित शायर मुन्नवर  को भी जहर उगलते देखा है। बात यहीं समाप्त नहीं होती एक अन्य मुम्बइया कलाकार जावेद भी कईबार अपनी गंदी मानसिकता का प्रदर्शन कर चुके हैं । देश की जानी मानी यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाला शर्जील तो आसाम को देश से काटने का फार्मूला सार्वजनिक मंच से बताते सुना जा चुका है। संसद पर हमले का मास्टरमाइंड अफजल गुरु और उसके जिहादी साथी भी शिक्षा को लज्जित करके इस देश को तोड़ने की साजिश में लिप्त पाए गए थे। तमाम मुल्ले मौलवियों को भी जहर उगलते हम रोज ही सुनते हैं राजनीतिक क्षेत्र में तो न जाने कितने आजम और ओवैसी इस देश की शांत फिजाओं में जहर घोलते सुने जा सकते हैं।

इन्होंने शायद यह भुला दिया है कि वो खुद इस देश के नागरिक हैं, भारतीय हैं, वे इसी देश की हवाओ में सांस ले रहे हैं यहीं का अन्न जल उन्हें इस काबिल बनाता है कि वे अलमस्त हो अपने षड्यंत्रकारी मंसूबों को अंजाम दे पा रहे हैं। उन्हें नहीं भूलना चाहिए कि यदि इस देश की सरकार संविधान और यहां का बहुसंख्यक हिन्दू समाज  तय कर ले तो यह लोग एक क्षण भी स देश में नहीं रह पाएंगे। कव्वाल परवेज के मामले में मध्यप्रदेश के गृहमंत्री के निर्णय की जितनी तारीफ की जाए कम है। देश की एकता अखंडता पर जहर उगलने वाले व्यक्ति के खिलाफ बड़ी से बड़ी दण्डात्मक कार्यवाही भी छोटी है। इस दृष्टि से गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने परवेज के खिलाफ न केवल मामला दर्ज करावाया है बल्कि उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस पार्टी को उत्तरप्रदेश रवाना करके कड़ा संदेश भी दिया है। उधर परवेज के खिलाफ हुई कानूनी कारवाई पर हमेशा की तरह कथित धर्मनिरपेक्षता वादियों ने विधवा विलाप शुरू कर दिया है।लोगों ने फेसबुक, ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया पर उसकी वकालत करनी शुरू कर दी है. कुछ मजहबी ठेकेदारों ने तो उसे बचाते-बचाते भारत देश को ही सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया. है कुछ तो कला और कलाकारों की अभिव्यक्ति पर हमला निरूपित कर रहे हैं।
ये लोग शायद यह भूल रहे है कि यह पाकिस्तान नहीं हिंदुस्तान है और वे खुद किसी धर्म विशेष का होने से पूर्व एक हिन्दुस्तानी हैं. जिस परवेज के लिए वो अपनी छाती पीट रहे हैं उसने देश के बारे में  एक सार्वजनिक मंच से बकवास की है। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है।
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