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यह शर्मनाक है, देशतोड़ू ताकतें मौके का फायदा उठाने की फिराक में

प्रवीण दुबे

किसी भी स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश में दो प्रांतों की सीमा को लेकर हिंसा होना और उसमें सुरक्षा बलों सहित आम नागरिकों के मारे जाने को किसी भी दृष्टि से सही नहीं ठहराया जा सकता इसकी जितनी निंदा की जाए कम है। आसाम और मिज़ोरम के बीच सोमवार को जो कुछ हुआ वह दोनों प्रदेशों की सरकारों के लिए भी शर्मनाक घटनाक्रम कहा जा सकता है। तनावपूर्ण स्थिति का इस हद तक जा पहुंचना कि गोलियां चलें और कई जान चली जाएं बेहद आश्चर्यजनक है क्यों कि यहां लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकारें होने के साथ कानून का शासन स्थापित है, दो दिन पूर्व ही यहां देश के गृहमंत्री अमितशाह ने दौरा किया था इस नजरिए से दोनों राज्यों के बीच की यह हिंसक झड़प बहुत कुछ इशारा करती है। इसके लिए देश की वर्तमान से लेकर पूर्व की केंद्र सरकारें भी अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती हैं। ऐसा इसलिए कि दोनों प्रदेशों के बीच का सीमा विवाद नया नहीं है। यह लम्बे समय से चला आ रहा है इसे वर्तमान के राजनीतिक परिदृश्य से जोड़कर भी नहीं देखना चाहिए जैसा कि कुछ कथित वामपंथी छाप लेखक पत्रकार व नेता करने का प्रयास कर रहे है। ऐसा इसलिये क्यों कि जब इन प्रांतों सहित केन्द्र में भी कांग्रेस सरकार थी तब भी यह सीमा विवाद था । देश की सत्ता पर काबिज सरकारें इस कारण दोषी कही जा सकती हैं क्यों कि इस विबाद को जितनी गम्भीरता से लेकर सुलझाने की कोशिश होना चाहिए थीं वो नहीं की गईं हैं। यह अकेला आसाम या मिजोरम का मसला नहीं है  हरियाणा-हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र-कर्नाटक, असम-अरुणाचल प्रदेश, असम-नगालैंड, असम-मेघालय और असम-मिज़ोरम के बीच सीमा को लेकर विवाद है ,देश के कुछ अन्य राज्यों में नदियों के जल बटवारे का भी विवाद है तो कहीं दो राज्यों के बीच नदियों के पानी को छोड़ने का विवाद भी है। इन सबको लेकर  हर राज्यों का अपना अलग-अलग दावा है.। देश की संसद में भी खुद गृह राज्यमंत्री ने इसे स्वीकार करते हुए यहां तक कहा है  कि कई मौक़े पर विवादित सीमावर्ती इलाक़ों से प्रदर्शनों और हिंसा की ख़बरें आती रहती हैं.दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार इलाक़े में शांति स्थापित करने का पूरा प्रयास करेगी. उन्होंने बताया, “नॉर्थ ईस्ट एमपी फ़ोरम ने मिज़ोरम और असम के सीमावर्ती इलाक़ों में रहने वाले लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की है.” । लेकिन क्या केवल इससे समस्या का स्थाई समाधान निकलने वाला है ? सबसे ज्यादा चिंता का विषय तो इस प्रकार के झगड़ों को राजनीतिक तूल दिए जाने को लेकर है। खासकर पूर्वोत्तर के राज्यों में सक्रीय चीन प्रेरित आतंकवादी शक्तियों का इस प्रकार की घटनाओं का लाभ उठाने की भी बड़ी चिंता का विषय है। जरूरी है कि केंद्र और राज्य सरकारें इस प्रकार के सीमा विवादों को सुलझाने के लिए साथ बैठकर कोई समाधान खोजें साथ ही यह बात ध्यान रखी जाए कि यह कोई दो देशों के बीच का सीमा विवाद नहीं है। सारे प्रांत व  वहां निवास करने वाले लोग हिंदुस्तानी नागरिक ही हैं। यह भाव मन में होगा तभी एक देश एक जन की परिकल्पना साकार होकर सभी विवाद सुलझ सकेंगे।dubeypraveen8152@gmail.com

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