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रविवार को सुनवाई के बाद ही फैसला हो सकेगा कि एडवोकेट अनिल मिश्रा और उनके साथी जेल से बाहर आएंगे या फिर कैद में रहेंगे.        

ग्वालियर 3 फरवरी 2026/प्रदेश के ग्वालियर जिले में डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र को जलाने और आपत्तिजनक नारे लगाने के मामले में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा समेत चार आरोपियों की जमानत याचिका पर शनिवार को हाईकोर्ट की स्पेशल डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई. इस दौरान हाईकोर्ट ने केस डायरी तलब की और राज्य शासन से जवाब मांगा. सरकार की ओर से समय मांगने पर अदालत ने मामले की अगली सुनवाई चार जनवरी को तय की है. रविवार को सुनवाई के बाद ही फैसला हो सकेगा कि एडवोकेट अनिल मिश्रा और उनके साथी जेल से बाहर आएंगे या फिर कैट में रहेंगे.

जेल में बंद अनिल मिश्रा समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि ग्वालियर पुलिस ने विधि प्रक्रिया का पालन नहीं किया. आरोप लगाया गया कि पहले गिरफ्तारी की गई और बाद में एफआईआर दर्ज की गई. इसके साथ ही परिजनों को गिरफ्तारी की सूचना भी समय पर नहीं दी गई. अधिवक्ता ने यह भी कहा कि एससी एसटी एक्ट के तहत नोटिस देकर छोड़ने का प्रावधान है, लेकिन इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.

गौरतलब है कि आंबेडकर अपमान मामले में एडवोकेट अनिल मिश्रा समेत चार आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर जिला न्यायालय की जेएमएफसी कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया था. पुलिस ने साइबर सेल थाने में अनिल मिश्रा समेत सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. आरोप है कि बीते गुरुवार को एसपी कार्यालय के सामने अनिल मिश्रा ने अपने साथियों के साथ डॉ. आंबेडकर का चित्र जलाते हुए नारे लगाए थे. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दलित समाज में आक्रोश फैल गया. शहर में धरना प्रदर्शन भी हुए थे.

दलित संगठनों की रासुका लगाने की मांग

दलित संगठनों ने एडवोकेट अनिल मिश्रा समेत आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए रासुका लगाने की मांग की है. पोस्टर जलाने के मामले में पुलिस ने गुरुवार देर रात उन्हें साथियों के साथ गिरफ्तार किया था. इसके बाद उन्हें शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया गया, जमानत नहीं मिलने पर सभी को जेल भेज दिया गया था.

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