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वर्चस्व की लड़ाई ने नागरिक सहकारी बैंक को झोंका चुनावी राजनीति में, एक नाम के कारण खड़ा हुआ सारा बखेड़ा

प्रवीण दुबे
बैंकिंग क्षेत्र में 42 वर्षों से सक्रिय सहकारी संस्थान नागरिक सहकारी बैंक मर्यादित ग्वालियर के निर्वाचन को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। दो पक्षों के बीच सुलह की सारी कोशिशें विफल होने के कारण बैंक के इतिहास में दूसरी बार निर्वाचन के हालात निर्मित हुए हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से सहकारिता क्षेत्र में सक्रिय नागरिक सहकारी बैंक के इतिहास में केवल एकबार छोड़कर अब तक आम सहमति से ही  निर्वाचन होते रहे हैं। 
ऐसा नहीं कि इस संस्थान में चुनाव लड़ने वालों की कोई कमी रही लेकिन संघ विचारों को अंगीकार कर समाज जीवन में सक्रिय सदस्यों ने सदैव संगठन के निर्णय को सर्वोपरि मानकर मैं नहीं हम के सूत्र को स्वीकार किया और सर्व सहमति से निर्वाचन सम्पन्न होते रहे। 
लेकिन इसबार आखिर ऐसा क्या हुआ ? जिस वजह से सर्व सहमति से निर्वाचन की गौरवशाली परम्परा टूट गई। 
सूत्रों की माने तो नाम वापस लेने के अंतिम घण्टों तक हमेशा की तरह समन्वय स्थापित करने की भरसक कोशिश की गई लेकिन केवल एक नाम को लेकर टकराहट इस कदर हावी हो गई की अंततः सहमति के सारे रास्ते बंद हो गए और एकमात्र चुनाव का रास्ता ही शेष बचा। 
सूत्रों का कहना है कि  आम सहमति बनाने के लिए जब एक पक्ष से उनके पैनल के नाम वापस लेने की बात कही गई तो  पक्ष ने यह शर्त रख दी कि  अधिकृत रूप से जो नाम तय किये गए हैं उनमें से केवल एक नाम एडवोकेट महेन्द्र अग्रवाल का वापस ले लिया जाए तो उनका पूरा पैनल चुनाव से हटने को तैयार है। 
मामला यहीं अटक गया तमाम कोशिशों के बावजूद महेंद्र अग्रवाल का नाम वापस नहीं हो सका परिणामस्वरूप चुनाव के हालात बन गए। 
जानकारी के मुताबिक आगामी 11 जून की तारीख चुनाव का लिए तय की गई है। 
रिटर्निंग आफीसर अशोक कुमार यादव के अनुसार  24 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।  हालात यह हैं कि अब दो पैनल पूरी तरह से खुलकर चुनाव में उतर गए हैं। बैंक के कर्मचारियों से लेकर वोटिंग का अधिकार प्राप्त सदस्यों को अपनी ओर खींचने के लिए दोनों ही पैनल के कई वरिष्ठ सदस्य पूरी तरह प्रचार और लॉबिंग करते दिखाई दे रहे हैं, चूंकि बैंक में वोट डालने का अधिकार प्राप्त सदस्यों की संख्या 6 हजार से अधिक है अतः यह चुनाव अब चर्चा का विषय बन गया है। जो भी सदस्य निर्वाचित होकर आएंगे वे बाद में अध्यक्ष का चुनाव करेंगे ।
ये हैं उम्मीदवार 
 
त्रिलोक चन्द्र अग्रवाल,विनोद सूरी,अतुल अधोलिया,राकेश केरवार,विनोद अष्टय्या, वंदना अरोरा,रचना सोलंकी,कविता जैन, जगदीश केवरे, रामनिवास सिंह गुर्जर, शिवनारायन गुप्ता, रविशंकर गोयल,चन्द्रप्रकाश चौरसिया, नितिन पाठक,नरेश चन्द्र शर्मा कौशिक,राकेश शर्मा,मनीषा शर्मा ,दिलीप अवस्थी,महेंद्र अग्रवाल, सुदर्शन गुप्ता,संजीव गोयल,किशोर घोटनकर,सुशील जैन, राजकुमार प्रजापति, अनारक्षित महिला वर्ग में 2,अनुसूचित जातिवर्ग में 1, सामान्य वर्ग में 9 मतों का प्रावधान होगा।
 
यूं हुई बैंक की शुरुआत, ऐसे चढ़ी सफलता की सीढ़ियां

परस्पर मिलकर कार्य करने से सफलता मिलती है। ‘‘एक सबके लिये सब एक के लिये‘‘ जैसे उदार विचार से ही सहकारिता का प्रारंभ एवं संगठन खड़ा होता है। इस विचारों एवं आचारों से आर्थिक स्वावलम्बन प्राप्त करने के संकल्प ने ही ‘‘नागरिक सहकारी बैंक मर्यादित ग्वालियर‘‘ की नींव, ढांचा एवं साज सज्जा तैयार की। वर्ष 1978 में पंजीकृत नागरिक सहकारी बैंक मर्यादित ग्वालियर ग्वालियर की प्रथम शहरी सहकारी बैंक ने निर्धारित अर्हताओं को पूर्ण करते हुये भारतीय रिजर्व बैंक से अनुज्ञा-पत्र प्राप्त कर 28 अप्रैल 1980 में बैंकिंग व्यवसाय प्रारम्भ किया। स्थापना की प्रथम साधारण सभा में ही 6 प्रतिशत लाभांश वितरण किया जो सभी सदस्यों के लिए आश्चर्य का विषय था। प्रदेश के नागरिक बैंकों में द्वितीय स्थान प्राप्त यह बैंक सफलता पूर्वक गत 42 वर्षो से चल रही है। इस बैंक के रजत जयन्ती समारोह में प्रदेश के माननीय  श्री शिवराज सिंह चैहान एवं पूर्व सहकारिता मंत्री श्री गोपाल भार्गव आतिथ्य ग्रहण कर बैंक की प्रगति पर हर्ष एवं उन्नति के लिये शुभकामनायें व्यक्त कर चुके हैं।

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