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वायरस के नए स्ट्रेन से देश में दहशत आज मिले 7 मरीज,वैज्ञानिकों ने कहा इसपर भी कारगर होगी वैक्सीन

ब्रिटेन से लौटे कुछ लोगों में कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन की मौजूदगी पाए जाने के बाद से एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। 70 फीसदी अधिक तेजी से फैलने वाले इस स्ट्रेन से देश में मंगलवार को सात लोग संक्रमित पाए गए हैं। हालांकि, इस बीच राहत की खबर भी आई है। सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने कहा है कि वैक्सीन नए स्ट्रेन के खिलाफ भी काम करेगी।

भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. के. विजय राघवन ने मंगलवार को कहा, ”टीके यूके और साउथ अफ्रीक्रा में पाए गए वायरस के नए वेरिएंट के खिलाफ भी काम करेंगे। कोई सबूत नहीं है कि मौजूदा वैक्सीन नए स्ट्रेन वाले वायरस से बचाने में फेल हो जाएंगी।”

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि यूके वेरिएंट के आने की खबर से पहले हमने करीब 5 हजार जिनोम सिक्वेंसिंग की है। उन्होंने कहा, ”अब हम इस संख्या में काफी इजाफा करने जा रहे हैं।” नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि ठंड के इस मौसम में अभी भी एक बड़ी आबादी कोविड-19 को लेकर अतिसंवेदनशील है। यूके वेरिएंट कई देशों में पहुंच चुका है, जिसमें भारत भी शामिल है। इस वेरिएंट की अपनी गति हो सकती है और हमें बेहद सावधान रहना है। कोई भी लापरवाही नहीं कर सकता है।

इससे पहले एम्स के डायरेक्टर और कोविड-19 मैनेजमेंट को लेकर बने नेशनल टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. रणदीप गुलेरिया ने शुक्रवार को कहा था कि हर महीने औसतन दो म्यूटेशन होते हैं और नए स्ट्रेन से बेवजह परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा है कि म्यूटेशन से लक्षण और इलाज रणनीति में कोई बदलाव नहीं आया है। अभी तक उपलब्ध डेटा के मुताबिक ट्रायल में चल रहे टीके नए स्ट्रेन के खिलाफ भी प्रभावी होने चाहिए।

ब्रिटेन से भारत लौटे सात लोगों के नमूनों में सार्स-सीओवी2 का नया स्वरूप (स्ट्रेन) पाया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि बेंगलुरू स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं स्नायु विज्ञान अस्पताल (निमहांस) में जांच के लिए आए तीन नमूनों, हैदराबाद स्थित कोशिकीय और आणविक जीव विज्ञान केंद्र (सीसीएमबी) में दो नमूनों और पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) में एक नमूने में वायरस का नया स्वरूप पाया गया।

मंत्रालय ने बताया कि राज्य सरकारों ने इन सभी लोगों को चिह्नित स्वास्थ्य सेवा केंद्रों में अलग पृथक-वास कक्षों में रखा है और उनके संपर्क में आए लोगों को भी पृथक-वास में रखा गया है। उसने बताया कि इन लोगों के साथ यात्रा करने वाले लोगों, उनके परिवार के सदस्यों और उनके संपर्क में आए लोगों का पता लगाया जा रहा है। अन्य नमूनों का जीनोम अनुक्रमण किया जा रहा है।

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