Homeधर्म कर्मशबरी की अनन्य राम भक्ति को समर्पित है आज का दिन

शबरी की अनन्य राम भक्ति को समर्पित है आज का दिन

 

फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की सप्तमी को शबरी जयंती मनाई जाती है। इस साल यह तिथि आज यानी 5 मार्च 2021 (शुक्रवार) को है। यह तिथि भगवान राम और माता शबरी को समर्पित है। कहा जाता है कि इस दिन माता शबरी की पूजा करने से भगवान राम का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। रामायण में वर्णित कथा के अनुसार, भगवान राम ने शबरी की भक्ति की पूर्ण करने के लिए उनके जूठे बेर खाए थे। इस दिन रामायण का पाठ करते हैं। भगवान राम और माता शबरी की स्मृति यात्रा निकाली जाती है।

शबरी जयंती का शुभ मुहूर्त-

शबरी जयंती- 05 मार्च 2021 दिन, शुक्रवार
सप्तमी तिथि आरंभ- 04 मार्च 2021 दिन बृहस्पतिवार, रात्रि 09 बजकर 58 मिनट से
सप्तमी तिथि समाप्त- 05 मार्च 2021 दिन शुक्रवार, रात्रि 07 बजकर 54 मिनट पर।

शबरी जयंती का महत्व- शास्त्रों के अनुसार, श्रीराम की भक्त शबरी ने प्रभु को अपने जूठे बेर खिलाए थे। वे नहीं चाहती थी कि भगवान राम को कोई भी खट्टा बेर मिले। इतना ही नहीं भगवान राम ने भक्त शबरी के जूठे बेर खाकर उनकी भक्ति को पूर्ण किया। यह कथा रामायण, रामचरित मानस, सुरसागर ग्रंथों में वर्णित है।

भगवान राम की शबरी से हुई मुलाकात-

रामायण में वर्णित है कि भगवान राम की वनवास के दौरान शबरी से मुलाकात हुई। शबरी का असली नाम श्रमणा था। जो एक भील समुदाय से थी। शबरी का विवाह एक भील कुमार से हुआ था। चूंकि शबरी के पिता भील जाति के मुखिया थे। शबरी हृदय बहुत निर्मल था।  जब शबरी का विवाह हुआ तो परंपरा के अनुसार पशुओं को बलि के लिए लाया गया।

शबरी यह देखकर आहत हुईं और विवाह से ठीक एक दिन पूर्व घर छोड़कर दंडकारण्य वन में आकर निवास करने लगी। यहां पर मातंग ऋषि तपस्या किया करते थे। शबरी ऋषि की सेवा करना चाहती थी, लेकिन उन्हें लगता था कि वह भील जाति से है इसलिए उसे यह अवसर नहीं मिल पाएगा। शबरी सुबह जल्दी उठकर ऋषियों के उठने से पहले उस मार्ग को साफ कर देती थी जो आश्रम से नदी तक का जाता था। शबरी कांटे चुनकर रास्ते में साफ बालू बिछा देती थी। शबरी यह सब चुपचाप करती थीं ताकि किसी को पता न चले।

एक दिन शबरी को ऐसा करते हुए एक ऋषि ने देख लिया और उसकी सेवा से ऋषि बहुत प्रसन्न हुए। ऋषि मातंग का जब अंतिम समय आया तो उन्होंने शबरी को बुलाकर कहा कि वो अपने आश्रम में ही प्रभु राम की प्रतीक्षा करें, वे उनसे मिलने जरूर आएंगे।  शबरी ऋषि की बात को मानकर भगवान राम का इंतजार करने लगी। रोज की तरह ही वह रास्ते को साफ करती। भगवान के लिए मीठे बेर तोड़कर लाती। मीठे बेर के लिए वह प्रत्येक बेर को चखकर एक पात्र में रखती। ऐसा करते हुए काफी वक्त गुजर गया।

एक दिन शबरी को पता चला कि दो सुंदर युवक उसे ढूंढ रहे हैं, वे समझ गईं ये और कोई नहीं बल्कि उसके प्रभु राम ही हैं। प्रभु को आश्रम आता देख शबरी खूब प्रसन्न हुईं। शबरी ने भगवान राम के चरणों को धोकर और आसन दिय। इसके बाद वह जूठे बेर लेकर आई जो भगवान राम के लिए लाई थीं।

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