ध्यान दीजिए कि भारत के तो देश के 8 राज्यों में हिन्दू अल्पसंख्यक हो गए हैं।लेकिन इन्हें वहां भी नहीं मिल रहा अल्पसंख्यक का दर्जा जहा ये अब मात्र अस्तित्व की लड़ाई भर लड़ रहे हैं ..इसी खतरे को देश भर में बताने सुरेश चव्हाणके जी ने भारत बचाओ यात्रा की थी जिसमे मांग थी एक कड़े जनसँख्या नियंत्रण कानून की ..इसी खतरे को टालने के लिए पूरे देश मे चल रहा हस्ताक्षर अभियान जिसमें आप की भी सहभागिता की आशा और अपेक्षा है राष्ट्र की अखंडता को बचाये व बनाये रखने के लिए .
ज्ञात हो कि देश के आठ राज्यों में हिन्दुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा देने के लिए आगामी 14 जून को राज्य अल्पसंख्यक आयोग की एक बैठक दिल्ली में
आयोजित की गई है। असल में भाजपा के नेता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर बताया था कि वर्ष 2011 की जनगणना में देश के आठ राज्यों लक्ष्द्वीप (2.5), मिजेरम (2.75), नगालैंड (8.75), मेघालय (11.53), जम्मू-कश्मीर (28.44), अरुणाचल प्रदेश (29), मणिपुर (31.39) और पंजाब (38.40) में अल्पसंख्यक हैं। लेकिन फिर भी हिंदुओं के अल्पसंख्यक अधिकारों को चुरा लिया गया है और मनमाने ढंग से बहुसंख्यकों में बांट दिया गया है क्योंकि न तो राज्य सरकार और न ही केंद्र सरकार हिंदुओं को अल्पसंख्यक मानती है.
इस वजह से इन 8 राज्यों में हिंदू अपने मूल अधिकारों से वंचित हो रहे हैं। उपाध्याय का कहना है कि, लक्षद्वीप (96.20) और जम्मू-कश्मीर (68.30) में मुसलमान बहुमत में हैं, इसके अलावा असम में (34.20), पश्चिम बंगाल (27.5), केरल (26.60), उत्तर प्रदेश (19.30) और बिहार (18) में भी अधिक संख्या में हैं इसके बावजूद भी वो अल्पसंख्यक होने का फायदा उठा रहे हैं और जो लोग असलियत में अल्पसंख्यक हैं वो अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं।

