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सिर्फ इस 1 योगासन से भाग जाती हैं 5 बीमारियां, पांचवी से हर कोई है परेशान

जैसा नाम वैसा काम। सर्व मतलब सभी और अंग मतलब हिस्से अर्थात सर्व अंग आसन। यह आसन शरीर के सभी अंगों के लिए लाभप्रद है। इस योगासन के गुण शीर्षासन जैसे ही हैं। सर्वांगासन से प्राप्त होने वाले लाभों के संदर्भ में  इस आसन की समुचित विधि को जानना आवश्यक  है।

सर्वांगासन करने की विधि

स्वच्छ शुद्ध वातावरण में आसन बिछाकर, करवट लेते हुए पीठ के बल लेट जाएं और कुछ देर लेटकर मन को शांत करें।

बाजुओं को कमर के पास सीधा रखते हुए हथेलियों को जमीन पर टिका दें।

पैर को आपस में मिलाकर और टांगों को सीधा रखकर सांस भरते हुए टांगों को ऊपर की तरफ लाएं और कोहनियों को जमीन पर अच्छी तरह से टिकाने के बाद दोनों हाथों से पीठ को सहारा दें।

तत्पश्चात कमर व टांगों को इस प्रकार सीधा करें कि पैर आकाश की तरफ हो जाएं।

सीने को ठुड्डी के साथ लगाने का प्रयास करें। शरीर को स्थिर व ध्यान को एकाग्रकर अपनी क्षमतानुसार रुकें।

तत्पश्चात टांगें सीधी रखते हुए सहजभाव से पूर्व स्थिति में आ जाएं और कुछ देर शवासन में लेटने के बाद ही उठें।

 

सर्वांगासन करने के लाभ

1. इस आसन से थायरॉइड ग्रंथि अति सक्रिय होती हैं। रक्तसंचार ठीक होता है और नाड़ी तंत्र(नर्वस सिस्टम) ठीक से काम करता है।

2. स्मरण शक्ति बढ़ाता है।

3. मूत्राशय (यूरीनरी ब्लैडर) से संबंधित बीमारियों में राहत प्रदान करता है।

4. चेहरे की चमक और तेज को बढ़ाता है।

5. पाचन तंत्र पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।

 

सावधानी:

हृदय रोगी इस आसान को न करें। किसी भी बीमारी के चलते योगाभ्यास से पूर्व अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। योग्य योग शिक्षक की देखरेख में ही इस आसन की शुरुआत करें।

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