अमेरिका के साथ
फ्रांस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, तुर्की, जॉर्डन, सऊदी अरब, इटली, जापान, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड्स, इजरायल, स्पेन समेत कई देश अमेरिका के साथ हैं।
असद का समर्थन
रूस, ईरान और चीन सीरिया की असद सरकार को समर्थन दे रहे हैं।
हमलों का लक्ष्य रासायनिक हथियार : मैक्रों
फ्रांसीसी राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने कहा कि सीरियाई सरकार की रासायनिक हथियारों के उत्पादन और उनके इस्तेमाल की क्षमता को लक्ष्य बनाकर ये हमले किए गए हैं। हम रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को बर्दाश्त नहीं कर सकते। फ्रांस ने मई 2017 में जो लक्ष्मण रेखा खीचीं थी उसे लांघा गया है। इसलिए मैंने फ्रांसीसी सेना को अभियान में शामिल होने का निर्देश दिया।
कोई विकल्प नहीं था : थेरेसा
ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने कहा कि सीरिया में सैन्य बल के इस्तेमाल के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसलिए मैंने ब्रिटिश सशस्त्र सेनाओं को सीरियाई सरकार की रासायनिक हथियारों की क्षमता को नष्ट करने के लिए हमले का आदेश दिया।
हमले ईरान-हिज्बुल्ला के लिए संकेत : इजरायल
इजरायल ने कहा कि सीरिया पर अमेरिकी नेतृत्व में किए गए हमले ईरान, सीरिया और लेबनानी आतंकवादी समूह हिज्बुल्ला के लिए अहम संकेत हैं। इजरायल के मंत्री योआव गलांट ने ट्वीट किया, सीरिया में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।
ईयू भी समर्थन में
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क ने कहा है कि यूरोपीय संघ सीरिया पर अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के हमले के पक्ष में खड़ा है। इस हमले ने साफ संकेत दिए हैं कि सीरिया सरकार रूस और ईरान के साथ मिलकर मानवीय आपदा जारी नहीं रख सकती।
नाटो भी साथ आया
नाटो महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने कहा कि यह हमला सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद शासन द्वारा रासायनिक हथियारों के साथ स्थानीय आबादी पर हमले की क्षमता को कम करेगा। नाटो को रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल अस्वीकार्य है और जो इसके लिए जिम्मेदार है, उसकी जवाबदेही होनी चाहिए।
सीरिया पर हमला आक्रामक कृत्य : पुतिन
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हमले को ‘आक्रामक कृत्य’ करार देते हुए कहा कि यह सीरिया में मानवीय संकट को और बढ़ाएगा। अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा किए गए हमले को लेकर मॉस्को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक बुला रहा है। इस हमले का अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पूरी व्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा। कथित रासायनिक हमलो का निरीक्षण करने वाले रूस के सैन्य विशेषज्ञों को डौमा में इसका कोई सबूत नहीं मिला है। कार्रवाई से पहले अंतरराष्ट्रीय रासायनिक हथियार निगरानी संस्था के निरीक्षकों का इंतजार करना चाहिए था। अमेरिका में रूस के राजदूत एनातोली एंतोनोव ने कहा, एक बार फिर हमें धमकाया जा रहा है। हम आगाह करते हैं कि ऐसी कार्रवाई को बिना परिणाम भुगते नहीं छोड़ा जाएगा। इसकी सारी जिम्मेदारी अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस पर है। रूस के राष्ट्रपति का अपमान करना अस्वीकार्य और अमान्य है।
ईरान ने अपराधी बताया
ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्लाह अली खमैनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, फ्रांस के मैक्रों और ब्रिटेन की थेरेसा मे की सीरिया में हमलों को लेकर निंदा करते हुए उन्हें अपराधी करार दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा, अमेरिका और उसके सहयोगियों के पास कोई सबूत नहीं है, उन्होंने जांच का इंतजार किए बिना ही सैन्य हमला कर दिया जो गलत है।