Homeश्रद्धाजंलिस्मृति शेष : सेवा है यज्ञकुंड समिधा सम हम जलें

स्मृति शेष : सेवा है यज्ञकुंड समिधा सम हम जलें

उनका सहसा यूं चले जाना समाज के लिए बहुत बड़ी क्षति कही जा सकती है। सच पूछा जाए तो श्रीमती प्रमिला वाजपेयी ने समाजसेवा और राजनीति में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वैचारिक पृष्ठभूमि वाले परिवार का श्रीमती वाजपेयी के जीवन पर  ऐसा प्रभाव पड़ा की उन्होंने संघ के सेवाभावी संगठन सेवाभारती के लिए खुद को समर्पित कर दिया। एक महिला के लिए बेहद कठिन होता है की वो अपना घर परिवार सम्भालने के साथ सामाजिक कार्य के लिए समय निकाले लेकिन श्रीमती प्रमिला वाजपेई ने अपने जीवन में इस मिथक को तोड़ा वे घर परिवार के कार्यों के उत्तरदायित्व के अलावा सेवाभारती के लिए सर्वस्व समर्पण का भाव लेकर कार्य करने हेतु सदैव तत्पर दिखाई देती थीं। एक समय तो ऐसा भी था जब वाजपेयी दम्पति को पूरे पूरे दिन सेवाबस्तियों में पिछड़े गरीब वर्ग के बीच कार्य करते देख सब आश्चर्यचकित रह जाते थे। गरीब परिवारों की चिंता करना उनका जैसे नित्य का ही कार्य था। सेवा बस्तियों में निशुल्क शिक्षण केंद्रों का संचालन ,समाज के बीच से ही इन केंद्रों की। चिंता करने वालों को खड़ा करना साथ ही शिक्षा के साथ गरीब निर्धन परिवारों के रोजगार व संस्कार की चिंता करते प्रमिला वाजपेयी ने इतना कार्य किया की वे अनेक लोगों खासकर महिलाओं की प्रेरणा बन गई। उनकी लोकप्रियता और सहज सरल कार्यव्यवहार सबसे आत्मीयतापूर्ण सम्बन्ध प्रमिला जी की विशेषता रही। यही वजह रही की राजनीति में सम वैचारिक संगठन भारतीय जनता पार्टी के आग्रह पर उन्होंने राजनीतिक क्षेत्र को सेवा के माध्यम के रूप में स्वीकार किया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को  प्रमिला जी अपना आदर्श मानती थीं,उन्होंने उनके तमाम आदर्शों को अंगीकार करने की न केवल कोशिश की बल्कि जब पार्षद का चुनाव लड़ा तो कृतिरुप में भी उनके आचरण में वह दिखाई भी दिया। प्रतिद्वंद्वी के प्रति  सदव्यवहार व शाब्दिक मर्यादा उन्होंने कायम रखी जनता ने उन्हें खूब प्यार दिया वे पार्षद चुनीं गईं और राजनीति को भी उन्होंने सेवा का माध्यम मानकर कार्य किया। उन्हें जब जिले की शिशु कल्याण समिति में शासन ने शामिल किया तो प्रमिला वाजपेयी ने अपनी ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा व प्रशासनिक क्षमता की गहरी छाप छोड़ी। अनाथ व लावारिस मिले बच्चों के प्रति उन्होंने मातृवत कार्य किया। कलेक्टर व बड़े से बड़े दबाव के सामने वे झुकी नहीं उन्होंने बेसहारा अनाथ व लावारिस बच्चों को गोद लेने वालों के लिए बिना किसी दबाव के सख्ती के साथ नियमों का पालन करवाकर सबका ध्यान आकर्षित किया था। वे एक महिला थीं और सदैव सामाजिक राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं के हक की तरफदारी पुरजोर तरीके से वे करती रहीं। नारी शक्ति के प्रति उनकी इस निष्ठा के कारण ही उन्हें मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग का सदस्य नामित किया गया था। राजनीति में उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की आने वाले समय में होने जा रहे नगरीय निकाय चुनाव हेतु जैसे ही महापौर के लिए ग्वालियर की सीट सामान्य महिला के लिए आरक्षित घोषित हुई श्रीमती  प्रमिला वाजपेयी का नाम तेजी के साथ उभरकर सामने आया हालांकि खुद उन्होंने कभी भी अपने लिए महापौर के टिकट की मांग नहीं की लेकिन उनके समर्थक उन्हें महापौर का सबसे बेहतर नाम मानकर चुनाव में टिकट के लिए मांग कर रहे थे। पार्टी संगठन के प्रति उनकी निष्ठा समर्पण व जनता के बीच ज़ोरदार लोकप्रियता के कारण यह तय माना जा रहा था की भाजपा से वे ही महापौर पद की प्रत्याशी होगी,इस दृष्टि से अचानक उनका हमारे बीच से चले जाना भाजपा सहित उनके शुभचिंतकों के लिए भी किसी वज्राघात से कम नहीं है। वास्तव में वे सेवा संस्कार समर्पण व संगठन के प्रति समर्पित एक धेयनिष्ठ व्यक्तित्व थीं। उन्होंने अपने जीवन व कार्यों से संघगीत ” सेवा है यज्ञकुंड समिधा सम हम जलें”  की पावन पक्तियों को चरितार्थ कर दिया। शब्दशक्तिन्यूज की ओर से उन्हें सादर श्रद्धांजलि।

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