मध्यप्रदेश सहित पूरे ग्वालियर चम्बल संभाग में सुबह से ही संकट मोचक पवनसुत हनुमान जन्मोत्सव की धूमधाम शुरू हो गई। अंचल के प्रसिद्ध धुआं हनुमान,दर्द हरौया सरकार, गरगज हनुमान खेड़ापति मन्दिर मन्सा पूर्ण हनुमान मंदिर आदि में प्रातः 5 बजे हनुमान जन्मोत्सव के कार्यक्रम प्रारंभ हो गए। सुबह से ही इन मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगना प्रारंभ हो गई है। इस वर्ष हनुमान जयंती के शनिवार को पड़ने से दुर्लभ योग बन गया है।
हनुमान जन्मोत्सव को लेकर मंदिरों के अलावा शहर में कई जगह कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इसको लेकर शुक्रवार को तैयारी चलती रही। कई जगहों पर हनुमान चालीसा व सुंदरकांड पाठ होगा। मारुति नंदन की सुबह से लेकर शाम तक शहर में जय-जयकार होगी। वही रात में जागरण भी चलेगा।
हस्त शनि पूर्णिमा का विशेष संयोग
भगवान हनुमान की जयंती चैत्र शुक्ल पक्ष पूर्णिमा शनिवार को हस्त शनि पूर्णिमा के संयोग में मनाई जाएगी। पंडितों के अनुसार मंगलवार के बाद शनिवार दिन भगवान हनुमान की पूजा के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से शनि का दुष्प्रभाव कम होता है।
शनि के कुदृष्टि के शमन, बलबुद्धि प्राप्ति सहित सभी क्लेशों के निवारण के लिए हनुमान की पूजा व सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत फलदायी होगा। आचार्य बताते हैं कि नवसंवत्सर की प्रथम पूर्णिमा को शनि ग्रह की कृपा दृष्टि प्रदान करने वाला है। इसकी कुंडली में शनि की दशा अढैया, साढ़ेसाती अथवा क्रूर दृष्टि बन रहा है। वह संकल्पपूर्वक विधिवत विष्णु की पूजा व विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ कराएं। इसके बाद पूरी आस्था के साथ हनुमान की पूजा करें। तिल तेल का दीपक जलाकर सुंदरकांड का पाठ करना दोषों का शमनकारण व शुभफलदायक होगा। इससे शनि की कृपा दृष्टि प्राप्त होगी और उलझे व रुके कार्य सिद्ध होंगे। यह मान्यता भी है कि चमेली के तेल में पीपा सिन्दूर मिलाकर हनुमान जी की प्रतिमा पर लेप करने से आरोग्यता की प्राप्ति होती है।