Homeप्रमुख खबरेंहार के बाद भाजपा में बवाल केंद्रीय मंत्री तोमर निशाने पर

हार के बाद भाजपा में बवाल केंद्रीय मंत्री तोमर निशाने पर

मात्र तीन सीटों की कमी के कारण सत्ता से दूर रहने वाली भारतीय जनता पार्टी में अब कद्दावर केंद्रीय मंत्री व चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह के खिलाफ विरोध के स्वर तेज होते दिखाई दे रहे हैं । आश्चर्यजनक बात यह है कि विरोध और आरोप की यह आवाजें उनके खुद के संसदीय क्षेत्र ग्वालियर से ही उठती सुनाई दे रही हैं। ग्वालियर जिला महानगर से भाजपा के विशेष आमंत्रित सदस्य व अभिभाषक अवधेश सिंह भदौरिया ने पार्टी के राष्ट्रीय व प्रदेश अध्यक्ष सहित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर नरेन्द्र तोमर सहित अन्य नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

अपने पत्र में श्री भदौरिया ने सीधे सीधे केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र तोमर ,शिवराज सरकार में मंत्री रही माया सिंह उनके पति ध्यानेन्द्र सिंह जिलाध्यक्ष देवेश शर्मा आदि पर भितरघात करने की बात कही है। उनका कहना है कि इसी कारण भाजपा के कई अधिकृत प्रत्याशियों को हार का मुंह देखना पड़ा है। उन्होंने श्री तोमर पर अपने पुत्रों को राजनीति में स्थापित करने के लिए दिमनी में कमजोर प्रत्याशी उतारने व लश्कर पूर्व में भीतरघात करा पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को हराने की बात कही है।

इस पत्र के वायरल होने के बाद पूर्व मंत्री व माया सिंह के पति ध्यानेन्द्र सिंह द्वारा श्री भदौरिया को मोबाइल किये जाने और उसमें की गई आपत्तिजनक बातचीत के वायरल होने के बाद यह मामला और अधिक गरमा गया है।

 

इतना ही नहीं पार्टी के एक अन्य मंत्री जयभान सिंह ने भी उनकी  हार के लिए भितरघात कारण बताते हुए अपरोक्ष रूप से केंद्रीय मंत्री पर ही निशाना साधते हुए कहा है कि प्रदेश में बाजी पलटने वाले चेहरे बेनकाब हो चुके हैं उन्हें पार्टी छोड़ देना चाहिए।

 

उधर ग्वालियर अंचल की 34 सीटों में से 26 पर मिली करारी हार के बाद कई प्रत्याशियों व उनके समर्थकों सहित तमाम पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा नरेन्द्र तोमर सहित अन्य शीर्ष नेतृत्व  की कारगुजारियों के बारे में सीधे शिकायत की खबरें आ रहीं हैं। यह कहा जा रहा है कि यदि साफगोई से काम किया जाता तो प्रदेश में पुनः भाजपा की सरकार चुनकर आती।

 

उधर ग्वालियर में यह बात भी सामने आई है कि अधिकांश ऐसे वार्डों में जहां भाजपा पार्षद या कुछ खास बड़े नेता रहते हैं वहां भाजपा प्रत्याशियों को कांग्रेस के मुकाबले कम वोट मिले हैं। इसपर भी पार्टी के भीतर बवाल मच गया है।

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