Homeदेशहिंदी के विरोध पर उतारू तमिलनाडु सरकार,चिदम्बरम ने भी सुर मिलाया

हिंदी के विरोध पर उतारू तमिलनाडु सरकार,चिदम्बरम ने भी सुर मिलाया

नई दिल्ली। तमिलनाडु में द्रमुक सहित विभिन्न

राजनीतिक दलों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में—

प्रस्तावित तीन भाषा फार्मूले का पुरजोर विरोध किया है। पार्टियों ने कहा है कि यह हिंदी थोपने का प्रयास है। तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि वह दो भाषा फार्मूला जारी रखेगी। मशहूर वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन की अगुआई वाली कमेटी द्वारा तैयार नीति मसौदा शुक्रवार को सरकार को सौंपा गया। केंद्र सरकार ने तीन भाषा फार्मूले को लेकर आशंकाओं को खारिज किया है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा है कि किसी राज्य पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी।

 

सरकार की वेबसाइट पर उपलब्ध राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 के मसौदे में कहा गया है कि तीन भाषा फार्मूले को पूरे देश में लागू करने की जरूरत है। बहुभाषी देश के लिए बहुभाषी संवाद क्षमता को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। हिंदी भाषी क्षेत्र के स्कूलों को भी देश के दूसरे हिस्से की भाषा पढ़ने की पेशकश करनी चाहिए। तीन भाषा फार्मूला का शिक्षा पर राष्ट्रीय नीति 1968 की मंजूरी के समय से ही पालन किया जा रहा है। आगे के वर्षो में भी स्वीकृति जारी रहेगी।

हिंदी थोपा तो सड़कों पर उतरेंगे : द्रमुक
द्रमुक के प्रमुख एमके स्टालिन ने कहा है कि प्री-स्कूल से 12वीं कक्षा तक हिंदी की पैरवी करने के लिए लाया जा रहा तीन भाषा फार्मूला एक बड़ा झटका है। इसकी सिफारिश देश को बांटने वाला होगा। तमिलनाडु में 1937 में शुरू हुए हिंदी विरोधी आंदोलन की याद दिलाते हुए द्रमुक नेता ने एक बयान जारी कर कहा कि 1968 से राज्य में दो भाषा फार्मूला लागू है। इसमें केवल तमिल और अंग्रेजी है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी हिंदी को कतई मंजूर नहीं करेगी और विरोध में सड़कों पर उतरेगी। उम्मीद है कि केंद्र की भाजपा सरकार दूसरा भाषा आंदोलन खड़ा करने का प्रयास नहीं करेगी। केंद्र से मसौदा वापस लेने की मांग करते हुए द्रमुक ने कहा है कि जैसे ही संसद का सत्र शुरू होगा उनकी पार्टी के सांसद अपनी आवाज उठाएंगे।

चिदंबरम ने भी किया विरोध
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने तमिल में किए गए कई ट्वीट में कहा है, ‘स्कूलों में तीन भाषा फार्मूला का अर्थ क्या है। इसका अर्थ यह है कि वे हिंदी को अनिवार्य विषय बनाएंगे। भाजपा सरकार का असली चेहरा दिखना शुरू हो गया है।’

कानूनी विकल्प आजमाएगी कमल हासन की पार्टी
भाकपा और लोकसभा चुनाव में भाजपा की सहयोगी रही पीएमके ने भी सिफारिश का विरोध किया है। एमएनएम के प्रमुख कमल हासन ने कहा है कि चाहे वह भाषा हो या प्रोजेक्ट यदि हम उसे पसंद नहीं करते तो उसे हम पर थोपा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी इसके खिलाफ कानूनी विकल्प की तलाश करेगी।

जावड़ेकर ने कहा, जनता की राय मिलने के बाद ही फैसला लेंगे
नई शिक्षा नीति के मसौदे पर शुरू हुए विवाद के बीच सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सफाई दी है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह कमेटी द्वारा तैयार मसौदा है। जनता की राय मिलने के बाद ही इस पर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने हमेशा देश की सभी भाषाओं को प्रोत्साहित किया है। किसी पर कोई भाषा थोपने का सवाल ही पैदा नहीं होता है। हम भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहित करना चाहते हैं।

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