ऐसा लगता है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पूरा देश जिस धूमधाम से मनाकर उन्हें श्रध्दासुमन अर्पित कर रहा है वह कांग्रेस को पसंद नहीं आया है, उसके नेताओं की धड़कनें इस कारण बढ़ी हुई हैं की आजादी के बाद से लेकर आजतक कांग्रेस जिस गांधी के नाम को भुनाकर अपनी राजनीति चमकाती रही है कहीं भाजपा उनसे छीन न ले। यही वजह है की महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमलावर तेवर अपनाते हुए कहा कि गांधी का नाम लेना आसान है लेकिन उनके रास्ते पर चलना आसान नहीं है.
कांग्रेस की पदयात्रा के समापन पर सोनिया गांधी ने कहा कि कुछ लोग देश को आरएसएस का प्रतीक बनाना चाहते हैं, लेकिन ये संभव नहीं है क्योंकि हमारे देश की नींव में गांधी के विचार हैं. सोनिया गांधी ने दिल्ली में राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस दफ़्तर से निकल कर राजघाट पहुंची कांग्रेस की पदयात्रा के समापन पर ये बातें कहीं.
गांधी जी का नाम लेना आसान है लेकिन उनके रास्ते पर चलना आसान नहीं है.
गांधी जी का नाम लेकर भारत को उन्हीं के रास्ते से हटकर अपनी दिशा में ले जाने की कोशिश करने वाले पहले भी कम नहीं थे लेकिन पिछले कुछ वर्षों में तो साम दाम दंड भेद का खुला कारोबार करके वे अपने आपको बहुत ताक़तवर समझते हैं.
सोनिया गांधी ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा की जिन्हें लोकतंत्र में भी सारी शक्ति खुद की मुट्ठी में रखने की प्यास है वो कैसे समझेंगे कि गांधी जी के स्वराज का क्या महत्व है.
और जिन्हें मौका मिलते ही अपने को सर्वेसर्वा बताने की इच्छा हो वो कैसे समझेंगे कि गांधी जी की निस्वार्थ सेवा का मूल्य क्या होता है.
महात्मा गांधी जी चाहते थे कि भारत और उसके गांव आत्मनिर्भर हों. आज़ादी के बाद इसी रास्ते पर चल कर कांग्रेस ने क्रांतिकारी परिवर्तन लाने के कदम उठाए हैं.
चाहे नेहरू जी, शास्त्री जी, इंदिरा जी, राजीव जी, नरसिम्हा राव जी या फिर डॉक्टर मनमोहन सिंह जी हों… सभी ने नए भारत के निर्माण के लिए दिन रात संघर्ष किया और तरक्की की नई मिसाल कायम की.