नई दिल्ली: आज देश भर में गुरु पूर्णिमा का त्यौहार मनाया जा रहा है. लेकिन आज ही के दिन साल का दूसरा चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है. आज लगने वाला चंद्र ग्रहण 16 और 17 जुलाई की रात 01.32 मिनट से शुरू होगा और सुबह 04.30 मिनट तक चलेगा. हालांकि इस ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले लग जाएगा, जिसकी वजह से दोपहर 9 बजे के बाद गुरु पूजन नहीं किया जा सकता है. ग्रहण का प्रभाव तीन घंटे तक रहेगा, सूतक लगने के कारण चारों धाम के कपाट सुबह तक बंद हो जाएंगे. वाराणसी में गंगा आरती भी शाम के बजाय दोपहर में होगी.
ये चंद्रगहण आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में ये चंद्र ग्रहण लग रहा है. इस ग्रहण का सभी राशियों पर अलग अलग प्रभाव पड़ेगा. इसका समय तीन घंटे का होगा. भारत के साथ-साथ ये चंद्र ग्रह ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, एशिया, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में भी दिखेगा. ये ग्रहण खंडग्रास चंद्र ग्रहण है. ये ग्रहण कई मायनों में खास है, क्योंकि 149 साल बाद इस प्रकार का चंद्र ग्रहण लग रहा है जो गुरु पूर्णिमा के दिन लगेगा. इससे पहले इस तरह का ग्रहण साल 1870 में लगा था.
चंद्रग्रहण का देश और दुनिया पर क्या हो सकता है असर?
चंद्र ग्रहण को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं. लेकिन अधिकतर ज्योतिषियों के अनुसार इस ग्रहण के कारण धरती के कुछ हिस्सों में भूकंप, सुनामी, और तूफान-चक्रवात जैसी घटनाएं हो सकती हैं. ये ग्रहण धनु राशी में होगा, चंद्रमा के साथ केतु और शनि भी रहेंगे. धनु राशी का स्वामी बृहस्पति वक्री है. सूर्य, राहू और अष्ट शुक्र से द्रष्ट चंद्रमा होगा. इन योग के कारण क्रूरता होगी. मंगल नीच का होने से समाज में दुःख और वैमनस्य बढ़ेगा, उत्तर-पूर्व, उत्तर तथा मध्य भारत में परेशानियां होंगी, समाज में क्रोध और वैमनस्य बढ़ेगा, भारत और आस-पास के क्षेत्रों में आपदा आ सकती है, जल संबंधी परेशानियां बढ़ेंगी, पानी के कारण बीमारियां बढ़ेंगी, मानसिक परेशानियां बढ़ेंगी, नई सरकारी नीतियां बनेंगी.
चंद्रगहण के दौरान क्या करें और क्या न करें-
सूतक लगने से पहले गुरु पुर्णिमा की पूजा कर लें.
सूतक के दौरान भोजन न करें.
सूतक के शुरू होने से लेकर ग्रहण के अंतिम समय तक साधना करें.
ये समय पूजा पाठ और धार्मिक कार्यों के लिहाज से श्रेष्ठ है.
ये आत्मविश्वास प्राप्ति के लिए सबसे सही वक्त होता है.
ग्रहण के खुली आंखों से नहीं देखें, ये नुकसान दायक हो सकता है.
ग्रहण के वक्त ईश्वर की पूजा करें और मंत्रों का जाप करें.