Homeप्रमुख खबरेंनाकारा नौकरशाही के लिए पूरे मध्यप्रदेश में जरूरी है यह सिंधिया कल्चर

नाकारा नौकरशाही के लिए पूरे मध्यप्रदेश में जरूरी है यह सिंधिया कल्चर

प्रवीण दुबे

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया एक बार फिर चर्चाओं में हैं उनके संसदीय क्षेत्र  का एक वीडियो जिसमें वे कलेक्टर को हड़काते नजर आ रहे हैं खासा वायरल है इसमें वे कलेक्टर से इस कारण खफा दिख रहे हैं क्यों कि कलेक्टर  सिंधिया की जन सुनवाई में आए जनता के आवेदनों को ठीक प्रकार से नहीं  रख रहे हैं।

जब सिंधिया ने तीखे तेवर दिखाए तब जाकर कलेक्टर साहब ने आवेदनों को ठीक प्रकार से सहेजा।
अब जरा सोचिये जब केंद्रीय मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधि के सामने जनसुनवाई के आवेदनों को सही से नहीं रखा जा रहा है तो आम जनता के साथ मध्यप्रदेश की नौकरशाही क्या स्थिति निर्मित करती होगी ?
वीडियो news version आपकी आवाज से साभार
मध्यप्रदेश के सभी जिलों में प्रत्येक सप्ताह जन सुनवाई होती है चंद मामलों को छोड़ दें तो जन सुनवाई में सामने आई परेशानियों को अधिकारी कर्मचारी गंभीरता से नहीं लेते हैं और जनता परेशान होती रहती है।

यही हालात सीएम हेल्पलाइन में दर्ज की गई शिकायतों का भी है कई बार इन शिकायतों का निदान ठीक से नहीं करने और उन्हें गंभीरता से न लेने के कारण कई अधिकारी कर्मचारी सस्पेंड भी किए जाते रहे हैं बावजूद इसके शिकायतों के निराकरण के प्रति इनका रवैया टालम टोल वाला ही नजर आता है।

नौकरशाही के इन्ही क्रिया कलापों के कारण जहां जन प्रतिनिधियों को जनता का उलाहना सहना पड़ते हैं वहीं सरकार को भी बदनामी झेलना पडती है
 कई बार  कई समस्याओं के समाधान न किए जाने  के  मामलों को जन प्रतिनिधियों की गुटबाजी से जोड़कर देखा जाने लगता है और सरकार की थू-थू होती है जबकि इसके पीछे नौकरशाही का नाकारापन ही मुख्य वजह होती है। जिन कलेक्टर साहब को सिंधिया के गुस्से का सामना करना पड़ा उन्हीं कलेक्टर साहब की एक ओर  नासमझी के कारण सिंधिया की किरकिरी हुई और अब मीडिया  इस मामले को सिंधिया तथा मुख्यमंत्री के बीच अदावत से जोड़कर प्रचारित कर  रहा है
लेकिन यहां भी प्रशासनिक अमला पाक साफ बना हुआ है इस मामले में अशोकनगर में उन्हीं विकास कार्यों का फीता पुनः सिंधिया से कटवा दिया गया जिनका पूजन कुछ दिन पूर्व ही मुख्यमंत्री कर चुके थे
साफ है प्रशासन सही समय पर चिंता करता तो यह गलती नहीं होती और सरकार में गुटबाजी का आरोप नहीं लगता।
समय समय पर ऐसे न जाने कितने मामले सामने आते रहते हैं जहां नौकरशाही की गलतियों के दुष्परिणाम सरकार को झेलना पड़ते है।
इस दृष्टि से देखा जाए तो अशोकनगर में सिंधिया ने कलेक्टर साहब को जो गर्मा गर्म सीख दी है वो बिल्कुल उचित है, जनता की तकलीफो के प्रति सजग न रहने वाले अधिकारियों कर्मचारियों को लेकर पूरे मध्यप्रदेश में सिंधिया कल्चर फॉलो करने की जरुरत है।
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