नगर निगम की टैक्स बढ़ोतरी को लेकर तमाम ग्वालियर वासियों, सामाजिक राजनीतिक संगठनो के विरोध के बाद सरकार को झुकना ही पड़ा। नगर निगम टैक्स बढ़ाने से आने वाले निकाय चुनाव में भाजपा को नुकसान हो सकता है इसलिए सरकार को आगे आना पड़ा। चौतरफा विरोध के बाद अंततः मप्र शासन को कहना पड़ा है की अभी नगरीय निकाय टैक्स में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं हाेगी। ग्वालियर व प्रदेश के अन्य नगरीय निकायों से जुड़ी जनता की जनभावना काे देखते हुए आदेश काे स्थगित कर दिया है। काेराेना काल में ऐसा आदेश लाने काे लेकर ग्वालियर के जनप्रतिनिधियों व तमाम संगठनों और आम नागरिकों ने इसे अनुचित बताया था। पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल व भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अभय चौधरी ने इसे वापस लेने की मांग करते हुए शासन को पत्र लिखा था,चेम्बर ने भी इसका विरोध किया था। आम नागरिकों में तो इसको लेकर रोषपूर्ण तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही थी । जन प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से इस मुद्दे पर लगातार बात की और इसी का नतीजा है कि आदेश स्थगित किया गया है। इस संबंध में देर शाम को आदेश जारी कर दिए गए। हालांकि स्थगन को लेकर अभी कई सवाल उठाए जा रहे हैं मंत्री ने स्पष्ट किया की यह हमेशा के लिए स्थगित हो गया है।
गौरतलब है मई या उसके बाद कभी मध्यप्रदेश के ग्वालियर सहित 16 नगर निगमों में चुनाव होने हैं। कांग्रेस तो ठीक, भाजपा भी इस फैसले से दंग थी। भाजपा हाईकमान इसे किसी भी निकाय चुनाव में गंवाना नहीं चाहता। यही कारण रहा कि सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप कर टैक्स बढ़ाने के फैसले को रुकवा दिया।
