ग्वालियर। ग्वालियर से प्रकाशित ब्राह्मण समाज की पत्रिका ब्रह्म के स्वर के चतुर्थ अंक का विमोचन थियोसोफिकल सोसायटी के सभागार में उत्तरप्रदेश सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री देश के वरिष्ठ साहित्यकार व हिंदी साहित्य भारती के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रविन्द्र शुक्ल के मुख्य आतिथ्य में आयोजित गरिमापूर्ण कार्यक्रम में किया गया।
इस अवसर पर श्री शुक्ल ने अपने सारगर्भित सम्बोधन में कहा कि ब्राह्मण समाज सबसे पहले अपने मूल स्वरूप को पहचाने । उन्होंने कहा कि अतीत का यदि अध्ययन करेंगे तो हमें पता चलेगा कि यहां तो सम्पूर्ण समाज को ही ब्राह्मण घोषित किया गया था। ऐसा किसी जाति विशेष के लिए नहीं अपितु उसके कर्म के आधार पर यह व्यवस्था की रचना की गई। श्री शुक्ल ने कहा की दुनिया में एकमात्र धर्म सनातन धर्म ही है बाकी समस्त सम्प्रदाय हैं । इसपर हम सभी को गर्व होना चाहिए श्री शुक्ल ने कहा कि वामपंथी सोच ने भारत में धर्म
निरपेक्षता का पाखंड किया जबकि भारतीय चिंतन में धर्म के बिना किसी भी बात की परिकल्पना तक निर्मूल है । श्री शुक्ल ने कहा कि ब्राह्मण समाज को नोकरी के पीछे भागने के बजाय अपनी बौद्धिक सामर्थ्य के सहारे नोकरी देने वाला बनने का पुरुषार्थ जागृत करना चाहिए और वे इसमें हर प्रकार की मदद को तैयार हैं।
इस मौके पर स्वागत भाषण एवं कार्यक्रम की रूप रेखा वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी डॉ. केशव पाण्डे द्वारा प्रस्तुत की गई अध्यक्षइय उदबोधन एम.डी. पाराशर चेयरमेन ब्राह्मण कोओपरेटिव सोयायटी एवं एमडी फाउन्डेशन द्वारा किया गया। इस मौके पर खासतौर से पं. अशोक बुधोलिया द्वारा ब्रह्म के स्वर पत्रिका के पिछले तीनों अंको की प्रतियां मुख्य अतिथि को
भेंट की गई। विमोचन कार्यक्रम के दौरान प्रकाश मिश्रा, के.डी. शर्मा, महेश दण्डोतिया, अश्विनी पाठक, गुरूदत्त शर्मा, नरेश कटारे, जगदीश पाठक, सुरेश शर्मा, केआर चौबे, डॉ. सी.पी. शर्मा, गणेश चतुर्वेदी, ऊषा चतुर्वेदी, विपिन शर्मा, प्रवीण दुबे, सुरेश दण्डोतिया, जितेन्द्र शर्मा, मनीष दीक्षित, सचिव पाण्डे, राजेन्द्र मुदगल, देवेन्द्र भार्गव, रामाधार चौबे,
विनोद मिश्रा, आदि मौजूद रहे। डॉ. केशव पाण्डे द्वारा रविन्द्र शुक्ल को शॉल-श्रीफल स्मृति चिन्ह द्वारा सम्मानित किया गया। अंत में आभार जितेन्द्र शर्मा ने व्यक्त किया।




