सरकार ने कहा है कि उसने गरीब तबके के मरीजों को महंगी दवाओं से राहत देते हुए दवाओं की कीमत में प्रभावी नियंत्रण के लिए कारगर कदम उठाए हैं। नतीजतन 1032 दवाओं की कीमत को नियंत्रण के दायरे में लाया गया है।
रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री मनसुखलाल मंडाविया ने को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान बताया कि जनसामान्य द्वारा बड़ी संख्या में इस्तेमाल की जाने वाली 1032 आवश्यक दवाओं की कीमत को नियंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि जरूरी दवाओं की कीमत में 90 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। मंडाविया ने कहा कि कीमत नियंत्रण के कारण ही अब जन औषधि केंद्रों पर मिल रही 526 किस्म की विभिन्न दवाएं बाजार कीमत से 90 प्रतिशत कम कीमत पर उपलब्ध हो रही हैं।
उन्होंने 80 प्रतिशत से अधिक महंगी दवाओं को आवश्यक दवाओं की सूची से बाहर रखने के सवाल के जवाब में बताया कि आवश्यक दवाओं की सूची स्वास्थ्य मंत्रालय तैयार करता है। इसमें व्यापक इस्तेमाल वाली दवाएं शामिल हैं।
मंडाविया ने बताया कि इन दवाओं का वितरण देश भर में शुरू किए गए 5358 जन औषधि केंद्रों से किया जा रहा है। उन्होंने दवा की गुणवत्ता में भी कोई कमी नहीं होने का दावा करते हुए कहा कि मानकों की कसौटी पर ये दवाएं दुरुस्त पाई गई है।
गरीब मरीजों को दवाएं नहीं मिल पाने की समस्या के सवाल पर उन्होंने बताया कि प्रत्येक जन औषधि केंद्र से 700 से अधिक दवाएं वितरित हो रही हैं। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि दवाओं की मात्रा कम हो सकती है, लेकिन जन औषधि केंद्रों पर प्रतिदिन औसतन 20 ट्रक दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने के कारण इन पर दवाओं का अभाव नहीं हो सकता है।