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अब छोटे किसानों तक भी आसानी से पहुंच सकेंगे अत्याधुनिक कृषि यंत्र, तोमर ने किया एप का शुभारंभ

 

छोटे व सीमान्त किसान उच्च मूल्य, तकनीक वाले कृषि यंत्रों का प्रयोग कम दाम पर कर सकेंगे-नरेन्द्र सिंह तोमर

नई दिल्ली, 24 सितंबर./   केन्द्रीय कृषि मंत्री  नरेन्द्र सिंह तोमर ने आज यहाँ कृषि किसान एप का शुभारंभ करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार सभी राज्य सरकारों के साथ मिलकर लगातार इस बात का प्रयत्न कर रही है कि कृषि के क्षेत्र में अधिक से अधिक काम किया जाये, जिससे किसानी लाभकारी हो और आने वाले कल में किसान की आमदनी दोगुनी हो.

उन्होंने कहा कि इस दृष्टि से प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में अनेक प्रकार की योजनाएं भारत सरकार ने बनाई हैं. भारत सरकार की लगातार कोशिश रही है कि कृषि के क्षेत्र में अधिकाधिक सुविधा, लघु और सीमान्त किसानों तक पहुंचे और वह किसान भी जो तकनीक से दूर हैं, वह भी तकनीक से जुड़ सकें, यंत्रीकरण से जुड़ सकें व उचित सलाह उन तक पहुँच सके. जिससे कि वह अपना उत्पादन भी बढ़ा सके और अपनी उत्पादकता बढ़ाने में भी वह सफल हो सके.

श्री तोमर ने कहा कि जो किसान सक्षम और बड़ा है, वह किसान वर्तमान तकनीक के भी नजदीक है और कृषि यन्त्र खरीदने में भी सक्षम है. उसे बैंक से भी समय समय पर आसानी से मदद मिल जाती है. लेकिन जो छोटा किसान है, वह बड़ा और आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग खेती में नहीं कर पाता, क्योंकि उसकी आय भी कम हैं और वह महंगे कृषि यन्त्र नहीं खरीद सकता. हमारे देश के किसानों के पास जो आधुनिक कृषि यन्त्र उपलब्ध हैं, वे यन्त्र कैसे देश के छोटे से छोटे किसान तक पहुंचें अथवा वह कैसे उनका उपयोग अपनी खेती में कर सके, इसके लिए कृषि मंत्रालय ने एक एप तैयार किया है. इसकी मदद से देशभर की मशीन बैंक को इकठ्ठा कर किसानों को रजिस्टर्ड किया गया है। जिन किसानों के पास खेती के लिए पर्याप्त कृषि यंत्र नहीं हैं, वे इन कस्टम हायरिंग सेवा से संपर्क कर अपनी खेती के लिए यंत्रों को खरीद भी सकते हैं और किराये पर भी ले सकते हैं।

यदि किसी किसान के पास कोई कृषि यन्त्र कुछ समय के लिए खाली पड़ा है अथवा वह उसके उपयोग का नहीं है, उस दौरान वह अपने इस कृषि यन्त्र को किराये पर किसी अन्य किसान को उपलब्ध करा सकता है, जिसके बदले उसे उचित मूल्य भी मिलेगा.

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि यह मोबाइल एप्लीकेशन पहले से ही कस्टम हायरिंग सेवा केंद्रों की तस्वीर / भौगौलिक स्थिति को उसके भू-निर्देशांक की सटीकता के तथा उसमें उपलब्ध मशीनरी तस्वीरों को अपलोड करता है. अभी तक इस मोबाइल एप पर 40,000 से अधिक कस्टम हायरिंग सर्विस सेण्टर उपलब्ध हैं और 1,21,000 से अधिक कृषि मशीनरी को किराये पर दिए जाने हेतु पंजीकरण किये जा चुके हैं.

इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी बल्कि कम समय सीमा में अधिक से अधिक जोतों तक मशीनीकरण की पहुँच बनाना भी संभव होगा.

श्री तोमर ने कहा कि कृषि मंत्रालय की सभी योजनाओं को जियो टैग करने की दृष्टि से “कृषि किसान एप” का भी शुभारम्भ / प्रमोचन किया।

इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, योजनाओं की मॉनिटरिंग करने में मदद मिलेगी तथा किसानों को समय-समय पर मौसम की भी जानकारी मिलती रहेगी।

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