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ग्वालियर में कोरोना का कहर :अब तो जागो कलेक्टर महोदय मुख्यमंत्री ने भी कह दिया बरतें विशेष सावधानी

ग्वालियर  / भोपाल /एक तरफ पूरा देश अनलॉक की तरफ बढ़ चला है तो दूसरी ओर चम्बल अंचल के सबसे बड़ा शहर ग्वालियर जबरदस्त कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गया है। प्रतिदिनं जारी कोरोना संक्रमण की सरकारी रिपोर्ट देखने पर पता चलता है की स्थिति कितनी भयावह है जहां प्रतिदिन दो से लेकर चार मरीज कोरोना से मृत बताये जा रहे हैं तो दूसरी ओर कोरोना संक्रमितों की संख्या हर दिन दो सौ ढाई सौ का आंकड़ा छूती दिखाई देती है। स्थिति कितनी खतरनाक है इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है की अब तो खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने ग्वालियर सहित 9 अन्य जिलों में विशेष सावधानी बरतने को कहा है। अफसोस की बात यह है की सब कुछ जानते हुए भी ग्वालियर का स्थानीय प्रशासन ने सब कुछ भगवान भरोसे छोड़ दिया है। महामारी ओर कोरोना संक्रमण को देखते हुए बनाये गए तमाम नियम कानून सिर्फ कागजों तक ही सिमटे दिखाई दे रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, मास्क की अनिवार्यता दिखावा बन गई है , संक्रमण खत्म करने के लिए जरूरी घोषित किये गए सेनेटाइजर, साबुन आदि की व्यवस्था में भी मनमर्जी दिखाई देती है बड़े बड़े भीड़ भरे राजनीतिक आयोजनों को कोई रोकने वाला नहीं है इतना सब जिला प्रशासन के नाक के नीचे घटित हो रहा है। कलेक्टर कमिश्नर व अन्य उच्च प्रशासनिक अमला हाथ पर हाथ धरे बैठे है।

अब तो मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के 9 जिलों के कलेक्टरों को कोरोनावायरस के संक्रमण के मामलों में विशेष सावधानी बरते जाने के निर्देश दिए हैं। इन जिलों में संक्रमित नागरिकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कहीं पॉजिटिविटी रेट बहुत ज्यादा है तो कहीं मृत्यु दर बढ़ती जा रही है। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर जिलों में विशेष सावधानी बरते जाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि शासन द्वारा कोरोना के उपचार के लिए प्रत्येक जिले में डेडिकेटेड कोविड अस्पतालों के माध्यम से उत्कृष्ट व्यवस्था की गई है। इसी के साथ कुछ निजी चिकित्सालयों को भी कोविड के इलाज के लिए अनुबंधित किया गया है, जहां पर सभी को नि:शुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इलाज की अच्छी व्यवस्था के चलते प्रदेश में बड़ी संख्या में मरीज स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं। हमारी रिकवरी रेट 76.4 प्रतिशत है।

बहुत से कोरोना संक्रमित तथा कोरोना संदिग्ध, जिनके घर पर व्यवस्था है, ‘होम आइसोलेशन’ तथा ‘होम क्वारेंटाइन’ को प्राथमिकता देते हैं। इसके लिए प्रत्येक जिले में ‘कमांड कंट्रोल रूम’ बनाए जाएं, जहां से ‘होम आइसोलेशन’ एवं ‘होम क्वारेंटाइन’ हुए व्यक्तियों की निरंतर देखभाल एवं निगरानी की जा सके। यहां एम्बुलेंस भी आवश्यक रूप से रखी जाए। दिन में कम से कम दो बार उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली जाए।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान मंत्रालय में वी.सी. के माध्यम से प्रदेश में कोरोना की स्थिति एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे थे। गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, डीजीपी श्री विवेक जौहरी, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्री मोहम्मद सुलेमान उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिए कि शासकीय चिकित्सालयों के साथ ही निजी चिकित्सालयों में भी कोरोना के इलाज के निर्धारित प्रोटोकॉल का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए, जिससे व्यक्ति अपनी इच्छा एवं सुविधानुसार शासकीय अथवा निजी अस्पतालों में इलाज करा सके। इसी के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि निजी चिकित्सालय मरीजों से मनमाना शुल्क न वसूल सकें। कोरोना का इलाज कर रहे निजी चिकित्सालयों के पास सभी आवश्यक संसाधन एवं चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो, यह भी देखा जाए।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि वे अपने क्षेत्र में निजी चिकित्सालयों के साथ समन्वय कर कोरोना के इलाज के संबंध में उनके पास उपलब्ध संसाधनों एवं चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी प्राप्त करें। कोरोना के इलाज के संबंध में निजी चिकित्सालयों को आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया जाए। निजी चिकित्सालयों के चिकित्सकीय अमले एवं संसाधनों का पूरा उपयोग किया जाए।
बैठक में बताया गया कि कोरोना के एक्टिव प्रकरणों में तुलनात्मक रूप से मध्यप्रदेश देश में 17वें स्थान पर आ गया है। वर्तमान में प्रदेश में एक्टिव प्रकरणों की संख्या 14 हजार 337 है।

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