Homeलेखसब कुछ अच्छा था तो आमिर को किस कीड़े ने काटा

सब कुछ अच्छा था तो आमिर को किस कीड़े ने काटा

 

शशि सिंह

 

आमिर खान और किरण राव ने अपने अलगाव पर प्रेस को एक बयान जारी किया है। बयान में उनके आपसी सम्बन्धों की व्याख्या में शब्द जैसे शहद की तरह टपक रहे हैं। इस बयान को पढ़कर तो यही लगता है कि पंद्रह साल का इनका वैवाहिक जीवन प्रेम और विश्वास से लबरेज़ था। इनके अनुभव आनन्दमयी रहे। सब कुछ इतना ख़ूबसूरत कि कहना ही क्या! पढ़कर लग ही नहीं रहा है कि यह तलाक़ की घोषणा है। इस घोषणा में बड़ा विरोधाभास है। इनके जीवन में सब कुछ इतना सुखमय ही था तो फिर किस कीड़े ने काटा कि ये अलग हो रहे हैं?
समझदारी और सकारात्मकता का अभिनय

असल में आमिर खान को किसी कीड़े ने नहीं काटा है। उनके भीतर यह कीड़ा हमेशा से रहा है। इस कीड़े को जिहादी कीड़ा कहते हैं। आमिर अभिनेता के वेश में एक जिहादी है जो हमेशा से अपने एजेंडे के तहत काम करता आया है। चूँकि इनका मामला हाई प्रोफ़ाइल है, लिहाज़ा आम लव जिहादियों की तरह हिन्दू लड़कियों से एक समय के बाद छुटकारे के लिए मार तो नहीं सकते लेकिन रिश्तों का अंत आराम से कर पाते हैं। यह आदमी समझदार दिखने का अच्छा अभिनय करता है। समझदारी में सकारात्मकता होती है, जो असलियत में इनमें नहीं है। यह शातिर हैं। थोड़े हाई लेबल वाले। ख़ैर, हमारी किरण और रीनाओं को कब समझ आयेगा कि इन मासूम (?) और समझदार (?) आमिरों से साथ निभाना मुश्किल है। यह आदमी जिहादी नेटवर्क से इस कदर कनेक्टेड है कि छोटे-मोटे लोगों के लिए तो इस आदमी के ख़िलाफ़ मुंह खोलना भी ख़तरे से ख़ाली नहीं।

बॉलीवुड में सेट होता है लव जिहाद का मॉडल

समाज में मुस्लिमों की तरफ़ से छेड़े गए लव जिहाद का मॉडल बॉलीवुड में सेट किया जाता है। यहां चूंकि लोग अधिक उदार होते हैं तो इस बहुत चर्चा नहीं होती। बॉलीवुड में तो इसकी चर्चा को भी बुरा माना जाता है लेकिन छोटे गांव-क़स्बों में इस रोल मॉडलों का गहरा असर रहता है। बॉलीवुड में अंतर-धार्मिक विवाहो

का चलन हमेशा से रहा है। लेकिन लव जिहाद और प्रेम विवाह के फ़र्क़ को आसानी से समझा जा सकता है। अधिकतर मामलों में यदि पति हिन्दू हुआ और पत्नी मुस्लिम तो ऐसी शादियाँ लम्बी चलती हैं। लम्बी क्या, जीवन भर का साथ रहता है। उदाहरण के लिए सुनील दत्त-नरगिस, सुनील शेट्टी-मोना क़ादरी, मनोज वाजपेयी-शबाना जैसे दसियों उदाहरण मिल जाएँगे जहां प्रेम में निरन्तरता मिलेगी। उम्र से पूरी अप्रभावित। वहीं दूसरी तरफ़ यदि पति मुस्लिम और पत्नी ग़ैर-मुस्लिम हुई तो उस गठजोड़ की उम्र पत्नी की उम्र ढलने तक ही रहती है। उदाहरण के लिए फ़रहान अख़्तर-अधुना भबानी, सैफ़ अली खान-अमृता सिंह, अरबाज़ खान-मलाइका अरोड़ा आदि के उदाहरण सामने हैं। शाहरुख़ खान और गौरी की जोड़ी इस मामले में ज़रूर अपवाद है।

आमिर खान लव जिहाद के मामले में सबसे शातिर हैं। एक के बाद एक दो-दो हिन्दू लड़कियों को उनके उम्र की ढलान पर छोड़ चुके हैं। कल को कोई तीसरी हिन्दू लड़की को वह अपनी पत्नी के रूप में पेश करें तो कोई हैरानी नहीं होगी।

पीके और दंगल में जिहादी निष्ठा

अपने जिहादी लक्ष्य को लेकर इनकी निष्ठा अटल रही है। इनकी फ़िल्मों में भी इनकी झलक अक्सर देखने को मिलती है। फ़िल्म ‘पीके’ में इन्होंने सनातन मान्यताओं की जमकर खिल्ली उड़ाई थी। क्या मजाल जो यह आदमी कभी भी मुस्लिमों से जुड़ी कुरीतियों या मान्यताओं पर अपनी फ़िल्मों में चूँ भी बोल दे। फ़िल्म ‘दंगल’ के समय तो इनका जिहादी खेल चरम पर था। यह फ़िल्म प्रसिद्ध पहलवान महावीर सिंह फोगाट और उनकी पहलवान बेटियों की कहानी पर आधारित थी। फोगाट परिवार पूर्णत: शाकाहारी रहा है लेकिन आमिर खान जानबूझकर उन्हें फ़िल्म में मांसाहारी बताता है। इसके लिए बड़ी सफ़ाई से सीन गढ़े जाते हैं।

अखाड़े के सेट से हनुमान जी अनुपस्थित

यह जिहादी भीतर से कितना पेचीदा है, इसका उदाहरण भी इस फ़िल्म के ही

के ही एक और उदाहरण समझा जा सकता है। फ़िल्म में हरियाणा की पृष्ठभूमि है जहां हर अखाड़े में पहलवानों के आराध्य पवनपुत्र हनुमान जी की मूर्ति या कम से कम एक फ़ोटो ज़रूर होती है। आपने पूरी फ़िल्म में ऐसा कुछ भी नहीं देखा होगा। यह कोई चूक नहीं थी। जानबूझकर की गई बदमाशी थी। शूटिंग के दौरान प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि सेट डिज़ाइन करने वाली टीम ने अखाड़े के सेट पर हनुमान जी को पर्याप्त उपस्थिति रखी थी जिसे आमिर खान ने अंत समय में हटवा दिया था। ऐसा एक कलाकार नहीं बल्कि कोई जिहादी ही कर सकता है।

सत्यमेव जयते

आमिर खान ने टीवी पर एक कार्यक्रम किया था सत्यमेव जयते। इसमें हिंदू समाज की कुरीतियों या अन्य मसले बहुत जोर-शोर से सवाल उठाए गए।  परंतु क्या आपने गौर किया क्या कि आमिर खान ने तीन तलाक, हलाला, मुस्लिम लड़कियों के खतरा या बुर्का प्रथा पर कोई एपिसोड किया। आमिर के लिए घूंघट औरतों पर अत्याचार है, परंतु बुर्का या हिजाब उनकी मजहबी भलमानसहत।

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