आषाढ़ माह में आने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। यह गुप्त नवरात्रि इस बार 13 जुलाई से प्रारम्भ हो कर 21 जुलाई को समाप्त होगी। इस गुप्त नवरात्रि पर मां काली का आर्शिवाद प्राप्त करने और जीवन को सफल बनाने के लिए नवरात्रि में 9 दिनों तक उपवास करने का संकल्प लेना चाहिए।
इसके साथ ही घटस्थापना भी करनी चाहिए। किसी भी धार्मिक कार्य को शुरू करने से पहले कलश स्थापना यानी घटस्थापना करने का विधान होता है। पौरणिक मान्यताओं के अनुसार यदि कलश स्थापना करने के बाद देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेकर कोई शुभ काम करेंगे तो वह निश्चिंत रूप से आपको सफलता दिलाएगा। आइये इस विषय पर जाने-
घटस्थापना करने का शुभ मुहूर्त:
यदि आप घटस्थापना करना चाहते हैं तो प्रातः 8 बजकर 17 मिनट के बाद कलश स्थापित करके माता की पूजा प्रारम्भ करें।
घटस्थापना की सरल विधि-
- देवी की पूजा प्रारंभ करने से पहले कलश के ऊपर रोली से ॐ और स्वास्तिक बनाएं।
- पूजा आरंभ करने से पहले अपने ऊपर जल छिड़कें और ‘ऊं पुण्डरीकाक्षाय नमः’ का जाप करें।
- आप जहां पूजा कर रहे हैं उस स्थल के दक्षिण और पूर्व के कोने पर घी का दिया जलाएं और ‘ॐ दीपो ज्योतिः परब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु में पापं पूजा दीप नमोस्तु ते।’ मंत्र पढ़ें।
- इसके बाद मां दुर्गा की मूर्ति रखें और उनके सामने जमीन पर सात प्रकार के अनाज, नदी की रेत और जौ डालें।
- इसके बाद कलश में जल या गंगाजल, सिक्का, पान, सुपारी, रोली, मौली, इलायची, चंदन, अक्षत, हल्दी और फूल डालें।
- अब कलश में थोड़ा और गंगाजल डालें और ‘ॐ वरुणाय नमः’ मंत्र पढ़ते हुए कलश को पूरा भर दें।
- इसके बाद आम की टहली रखें। फिर एक कटोरी में जौ या कच्चा चावल भर कर कलश पर रखें।
- फिर कलश के ऊपर लाल कपड़े से लिपटा हुआ कच्चा नारियल रखें। इसे अपने माथे के पास लाते हुए वरुण देवता को प्रणाम करें और रेत पर कलश स्थापित करें।
- कलश स्थापना के बाद अखंड ज्योति जलाएं जो नौ दिनों तक जलती रहे।