नई दिल्लीः अभी तक सिर्फ रिश्वत लेने वाले अफसर ही कानून के शिकंजे में फंसते थे लेकिन अब से रिश्वत देने वाले लोग भी कानून के कटघरे में खड़े हुए दिखाई देंगे क्योंकि भ्रष्टाचार पर रोकथाम के लिए मंगलवार को लोकसभा ने भ्रष्टाचार निरोधक संशोधन विधेयक-2018 को मंजूरी दे दी है. ये विधेयक राज्य सभा से 19 जुलाई को ही पास हो चुका है. जिसमें अब नए कानून के मुताबिक रिश्वत लेने वालों की तरह रिश्वत देने वालों को भी 3 से 7 साल की कैद का प्रावधान किया गया है इसके साथ ही जुर्माना भी लगाया जाएगा.
राज्य सभा ने इस विधेयक को कई संशोधनों के बाद पारित किया है जिसके बाद मंगलवार को चर्चा के दौरान पीएमओं में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने इस विधेयक को ऐतिहासिक करार दिया है. जितेंद्र ने कहा, इसमें रिश्वत देने वालों को भी पारिभाषित किया गया है. जिससे इस नए कानून में ईमानदार कर्मचारियों को संरक्षण दिए जाने का प्रावधान किया गया है. राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह मंगलवार को लोकसभा में कहा, रिश्वत लेने वाले के साथ रिश्वत देने वाला भी समान रूप से जिम्मेदार है. लेकिन इसके साथ इस विधेयक में इस बात को भी सुनिश्चित किया गया है कि किसी को भी इस कानून से बेवजह परेशान नहीं किया जाए.
भ्रष्टाचार निरोधक कानून (1988) संशोधन के लिए 2013 में पेश किया गया था इसके बाद इस विधेयक को संसद की स्थायी समिति के पास भेजा गया था स्थाई समिति ने इस पर अपने विचार रखने के बाद इसको प्रवर समिति के पास भेजा था जिसके बाद इसको समीक्षा के लिए विधि आयोग के पास भी भेजा गया. अंत में समिति ने 2016 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी जिसके बाद 2017 में इस विधेयक को दोबारा संसद में पेश किया गया था.
नए कानून के मुताबिक किसी भी लोकसेवक पर भ्रष्टाचार का मामला चलाने से पहले अगर वह केंद्र का है तो पहले लोकपाल और अगर लोकसेवक राज्य का है तो राज्यों में लोकायुक्तों की अनुमति लेनी होगी. इसके अलावा जिस व्यक्ति पर रिश्वत देने का आरोप होगा उसको अपनी बात रखने के लिए 7 दिनों का समय दिया जाएगा जिसे कुछ विशेष परिस्थियों में 15 दिन तक बढ़ाया जा सकता है.