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12 घंटे में ही दम तोड़ गया सीजफायर का समझौता ईरान ने बंद किया हॉर्मुज अमेरिका द्वारा तेहरान पर पुनः हवाई हमले की खबर

दुनिया ने अभी राहत की सांस लेना शुरू ही किया था कि अचानक सब कुछ बिखर गया. जिस शांति और सीज फायर का ढिंढोरा पीटा जा रहा था, वह महज 12 घंटे में कागजों का ढेर साबित हुआ. बुधवार की रात होते-होते खबर आई कि इजरायल ने लेबनान पर अब तक का सबसे भीषण हमला कर दिया है. जैसे ही लेबनान की धरती धमाकों से दहली, ईरान ने भी अपना रुख कड़ा कर लिया.

ईरान की सेमी-ऑफिशियल न्यूज एजेंसी फार्स ने साफ कर दिया है कि अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य से किसी भी तेल टैंकर को गुजरने नहीं दिया जाएगा. हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि जो सीजफायर दो हफ्ते तक चलने वाला था, वह 12 घंटे में ही दम तोड़ चुका है. सबसे ज्यादा चौंकाने वाली खबर तो यह है कि अमेरिका ने ईरान की राजधानी तेहरान पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं.

पूरी फसाद की जड़ वह विरोधाभास बना, जो सीजफायर के ऐलान के वक्त ही दिख रहा था. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया था कि इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच हुआ यह समझौता लेबनान को भी कवर करता है. लेकिन इजरायल का मन कुछ और ही था.

इजरायली सेना ने साफ कर दिया कि उनका ऑपरेशन हिजबुल्ला के खिलाफ जारी रहेगा. आज इजरायल ने लेबनान पर वो हमला किया जिसे युद्ध की शुरुआत के बाद से अब तक का सबसे बड़ा हमला कहा जा रहा है. जैसे ही लेबनान में आग की लपटें उठीं, ईरान ने इसे समझौते का उल्लंघन माना. ईरान का कहना है कि जब वादा सभी मोर्चों पर शांति का था, तो इजरायल ने लेबनान को निशाना बनाकर पीठ में छुरा घोंपा है.

ईरान ने जैसे ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का फैसला लिया, पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ गईं. यह वो रास्ता है जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है. फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सीजफायर लागू होने के बाद से अब तक सिर्फ दो तेल टैंकरों को यहां से गुजरने की इजाजत दी गई थी, लेकिन अब रास्ता पूरी तरह बंद है. हॉर्मुज के दोनों तरफ जहाजों की लंबी कतार लग गई है.

सैकड़ों विशाल तेल टैंकर समुद्र के बीच फंसे हुए हैं और उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं मिल रही है. यह नाकेबंदी सिर्फ एक सैन्य फैसला नहीं है, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर किया गया एक बड़ा प्रहार है. अगर यह रास्ता ज्यादा समय तक बंद रहा, तो पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की हाहाकार मचनी तय है.

तेहरान पर अमेरिकी हमला और समझौते का अंत

सबसे डरावना मोड़ तब आया जब तेहरान से धमाकों की आवाजें सुनाई देने लगीं. इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि अमेरिकी वायुसेना तेहरान में टारगेटेड स्ट्राइक कर रही है. यह सीधे तौर पर ईरान की संप्रभुता पर हमला है और अब किसी भी तरह की बातचीत की गुंजाइश खत्म होती दिख रही है.

12 घंटे पहले जो ट्रंप सीजफायर की बात कर रहे थे, अब उनकी सेना तेहरान पर बम बरसा रही है. इससे यह साफ हो गया है कि अमेरिका और इजरायल किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. ईरान की राजधानी को निशाना बनाना इस बात का संकेत है कि अब यह लड़ाई एक नए और ज्यादा खतरनाक लेवल पर पहुंच गई है.

फंस गए सैकड़ों जहाज और बेबस हुए मध्यस्थ

इस संकट ने उन मध्यस्थों को भी बेबस कर दिया है जिन्होंने दिन-रात एक करके यह डील करवाई थी. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख ने जिस 10 सूत्रीय फॉर्मूले पर सहमति बनवाई थी, उसे इजरायल के एक फैसले ने मिटा दिया. अब जो हालात हैं, उनमें सुधार की गुंजाइश कम ही दिख रही है.

हॉर्मुज जैसे संकरे रास्ते पर सैकड़ों जहाजों का फंसना ग्लोबल ट्रेड के लिए किसी बुरे सपने जैसा है. इजरायल का कहना है कि वह हिजबुल्ला को खत्म किए बिना नहीं रुकेगा, चाहे सीजफायर का जो भी हो. अमेरिका ने तेहरान पर हमला करके ईरान को सीधे युद्ध के मैदान में खींच लिया है. पूरी दुनिया अब एक अनिश्चित भविष्य की ओर देख रही है जहां शांति की बातें अब बहुत दूर की कौड़ी लग रही हैं.

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