Homeप्रमुख खबरेंमुख्यमंत्रीजी जरा इस बारे में भी कुछ सोचिये ?

मुख्यमंत्रीजी जरा इस बारे में भी कुछ सोचिये ?

प्रवीण दुबे

गोदरेज की नई इकाई से सरकार और कंपनी को करोड़ों का फायदा, ग्वालियर-भिंड के आम उपभोक्ताओं को क्या मिलेगा?

ग्वालियर 25 अगस्त 2026/ग्वालियर और भिंड से सटे मालनपुर की धरती पर 26 अगस्त को औद्योगिक विकास की एक बड़ी तस्वीर सामने आएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यहां गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड की विस्तारित चौथी विनिर्माण इकाई का शुभारंभ करेंगे। करीब 450 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से तैयार इस इकाई से बड़े पैमाने पर उपभोक्ता उत्पादों का उत्पादन किया जाएगा।

इस विस्तारित इकाई में प्रतिवर्ष करीब 42 करोड़ हेयर कलर सैशे, 14 करोड़ मच्छर निरोधक उत्पाद और 10 करोड़ एयर फ्रेशनर सैशे तैयार करने की क्षमता होगी। इसके अलावा हेयर क्रीम उत्पादन की क्षमता भी बढ़कर करीब 7,300 मीट्रिक टन हो जाएगी।

इस औद्योगिक निवेश का लाभ सरकार को भी मिलेगा। अनुमान के मुताबिक इस इकाई से राज्य सरकार को प्रतिवर्ष करीब 185 करोड़ रुपये का अतिरिक्त केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर तथा राज्य वस्तु एवं सेवा कर राजस्व प्राप्त होगा।

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स को दुनिया की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों में गिना जाता है और डॉव जोंस सस्टेनेबिलिटी इंडेक्स के अनुसार कंपनी दुनिया की दूसरी सबसे टिकाऊ एफएमसीजी कंपनियों में शामिल है। ऐसे में मालनपुर में कंपनी की नई विनिर्माण क्षमता स्थापित होना क्षेत्र के औद्योगिक महत्व को भी बढ़ाता है।

लेकिन सवाल यह है—स्थानीय जनता को क्या मिलेगा?

सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व मिलेगा, कंपनी को उत्पादन और कारोबार का विस्तार मिलेगा और मालनपुर-ग्वालियर-भिंड क्षेत्र को औद्योगिक पहचान मिलेगी। लेकिन इस पूरे निवेश से ग्वालियर और भिंड के सामान्य उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर क्या फायदा मिलेगा?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से यही सवाल स्थानीय स्तर पर पूछा जाना चाहिए कि जब इस क्षेत्र की जमीन और स्थानीय परिवेश में इतनी बड़ी कंपनी करोड़ों रुपये का उत्पादन करेगी और सरकार को भी हर वर्ष करोड़ों रुपये का राजस्व मिलेगा, तो क्या यहां के उपभोक्ताओं के लिए कंपनी से विशेष कीमत या अतिरिक्त छूट की व्यवस्था कराने की पहल नहीं होनी चाहिए?

कंपनी चाहे तो ग्वालियर-मालनपुर-भिंड क्षेत्र में अपने उत्पादों के लिए विशेष उपभोक्ता केंद्र या आउटलेट शुरू कर सकती है। यहां निर्मित उत्पादों पर स्थानीय उपभोक्ताओं को विशेष छूट देकर कंपनी अपने औद्योगिक निवेश का लाभ उस क्षेत्र के लोगों तक सीधे पहुंचा सकती है, जहां से उसे उत्पादन का आधार मिला है।

जेसी मिल में थी ऐसी व्यवस्था

ग्वालियर के औद्योगिक इतिहास में इसका एक उदाहरण पहले भी देखने को मिलता है। शहर में संचालित जेसी मिल में बिड़ला परिवार की पहल पर स्थानीय लोगों के लिए विशेष दुकान संचालित होने की व्यवस्था थी। यहां ग्वालियर और आसपास के लोगों को जेसी मिल में निर्मित शूटिंग के कपड़े भारी छूट के साथ उपलब्ध कराए जाते थे।

ऐसी व्यवस्था से स्थानीय लोगों को यह महसूस होता था कि उनके शहर में स्थापित बड़े उद्योग का लाभ उन्हें भी मिल रहा है।

ब्रिटानिया, जेके, कैडबरी और गोदरेज जैसी कंपनियां, फिर भी स्थानीय उपभोक्ता क्यों वंचित?

ग्वालियर की विडंबना यह है कि लंबे समय से यहां और आसपास ब्रिटानिया, जेके, कैडबरी, गोदरेज जैसी बड़ी कंपनियों का औद्योगिक उत्पादन और कारोबार रहा है, लेकिन स्थानीय सामान्य उपभोक्ताओं के लिए इन कंपनियों के उत्पादों पर कोई विशेष स्थानीय लाभ या उपभोक्ता सुविधा दिखाई नहीं देती।

ऐसे में मालनपुर में गोदरेज की नई इकाई के शुभारंभ के मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने एक नई पहल का सुझाव रखा जा सकता है—सरकार और उद्योग दोनों को फायदा हो तो उस औद्योगिक विकास का कुछ प्रत्यक्ष लाभ स्थानीय उपभोक्ताओं तक भी पहुंचे।

आखिर जिस ग्वालियर-भिंड अंचल में करोड़ों रुपये का उत्पादन होगा, वहां के लोगों को यह अधिकार क्यों न मिले कि उन्हें उसी कंपनी के उत्पाद कुछ विशेष रियायत के साथ उपलब्ध हों?

यह पहल केवल उपभोक्ताओं के लिए राहत नहीं होगी, बल्कि स्थानीय उद्योग और जनता के बीच एक मजबूत संबंध बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
Praveen dubey @ shabdshakti news. in

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