ग्वालियर 08 अक्टूबर 2026/ सही जानकारी और तकनीक से उन्नत खेती की जाए तो फायदा ही फायदा होता है। जिले के गजराज सिंह ने आत्मा परियोजना के माध्यम से उन्नत खेती की जानकारी ली और शुरू किया फूलों की खेती का काम । सही दिशा में उठाया हुआ कदम उसे और उसके परिवार को उन्नति की ओर ले गया है। गजराज का कहना है कि सही जानकारी और सही तकनीक का उपयोग किया जाए तो खेती को लाभ का धंधा बनाया जा सकता है।
जिले के ग्राम भयापुरा निवासी किसान श्री गजराज सिंह कुशवाह ने आत्मा परियोजना के माध्यम से प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन लेकर खेती को लाभ का जरिया बनाया है। कभी पिता को कर्ज में देखकर चिंतित रहने वाले गजराज सिंह ने उन्नत खेती का रास्ता अपनाया और आज गुलाब की खेती से प्रति हेक्टेयर पाँच लाख रुपए से अधिक की आय अर्जित कर रहे हैं।
श्री गजराज सिंह बताते हैं कि उन्होंने बचपन से अपने पिता श्री रमाजीलाल कुशवाह को खेती करते और कर्ज की चिंता से जूझते देखा। पिता का हाथ बंटाते-बंटाते उन्हें खेती का अनुभव तो मिला, लेकिन मन में हमेशा यह सवाल रहता था कि क्या उनका जीवन भी कर्ज में ही गुजर जाएगा और क्या उनका परिवार सुखी जीवन नहीं जी पाएगा।
इन्हीं सवालों के जवाब तलाशते हुए वे कार्यालय आत्मा, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, जिला ग्वालियर पहुंचे। अधिकारियों से अपनी समस्या साझा करने पर उन्हें उन्नत खेती अपनाने और बेहतर लाभ प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके बाद उन्होंने आत्मा से प्रशिक्षण प्राप्त किया और खेती में नवाचार की दिशा में आगे बढ़ना शुरू किया।
गजराज सिंह ने शुरुआत में पारंपरिक रूप से बोई जाने वाली सरसों, चना और गेहूं के स्थान पर सब्जियों की खेती शुरू की। उन्होंने मेथी और मिर्च जैसी नगदी फसलों की खेती की, जिससे उन्हें अच्छा लाभ प्राप्त हुआ। इसके बाद उन्होंने आलू, बैंगन और पपीता जैसी फसलों का उत्पादन भी शुरू किया।
आत्मा के बीटीएम श्री उदय आर्य और एटीएम श्री आर. के. सिंह ने उन्हें लहसुन की उन्नत खेती की तकनीक भी बताई। तकनीकी मार्गदर्शन के आधार पर उन्होंने लहसुन की खेती की, जिससे उन्हें एक बीघा में लगभग पचास हजार रुपए का लाभ हुआ। इस सफलता से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्हें महसूस हुआ कि वैज्ञानिक एवं उन्नत तरीके से खेती को लाभ का प्रभावी साधन बनाया जा सकता है।
इसके बाद उन्होंने आत्मा के अधिकारियों के समक्ष और अधिक तकनीकी खेती सीखने की इच्छा व्यक्त की। अधिकारियों ने उन्हें विभिन्न स्थानों का भ्रमण कराया, जहां उन्होंने अलग-अलग कृषि गतिविधियों के साथ गुलाब की खेती की तकनीक भी सीखी। प्रशिक्षण और भ्रमण से मिले अनुभव के आधार पर उन्होंने अपने खेत में गुलाब की खेती शुरू की।
आज गुलाब की खेती से उन्हें प्रति हेक्टेयर पाँच लाख रुपए से अधिक का लाभ प्राप्त हो रहा है। उनकी सफलता से परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है और उनके बच्चे भी अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। श्री गजराज सिंह के पास कुल 8.80 हेक्टेयर भूमि है, जिसमें वे मिर्च, बैंगन, मेथी, आलू, पपीता और गुलाब सहित विभिन्न फसलों का उत्पादन कर रहे हैं।
उन्नत एवं नवाचार आधारित खेती के लिए आत्मा परियोजना द्वारा श्री गजराज सिंह को जिला स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें पुरस्कार स्वरूप 25 हजार रुपए की राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। इस सम्मान से उत्साहित गजराज सिंह ने आत्मा परियोजना के अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और प्रोत्साहन ने उन्हें खेती को नई दृष्टि से देखने का अवसर दिया।
आज गजराज सिंह की कहानी यह बताती है कि उन्नत तकनीक, प्रशिक्षण और खेती में विविधीकरण को अपनाकर किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बेहतर आमदनी का मार्ग तैयार कर सके