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ग्वालियर में भाजपा के लिए परेशानी का कारण बन सकता है चुनाव आयोग का ये आदेश

सरकारी बंगले से संचालित होता है भाजपा का सम्भागीय कार्यालय, अधिकृत कार्यालय मुखर्जी भवन है उपेक्षा का शिकार

आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर चुनाव आयोग द्वारा राजनीतिक दलों के लिए जारी एक आदेश ग्वालियर में भाजपा की मुश्किलें बढ़ा सकता है । इस आदेश में दरअसल, मंत्री, विधायक और जनप्रतिनिधि अपने  सरकारी बंगले में चुनावी बैठक नहीं कर पाएंगे।  पार्टी प्रचार के लिए अपने सरकारी बंगले मेंचुनाव सामग्री भी नहीं लगा सकेंगे। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर में भाजपा का सम्भागीय कार्यालय जिस 38 रेसकोर्स स्थित बंगले

में संचालित होता है वह सरकारी स्थान है और भाजपा नेता के नाम से किराये पर लिया गया है। जब से यह जगह ली गई है उसके बाद से लम्बे समय तक ग्वालियर में अधिकृत रूप से  भाजपा कार्यालय रहे श्यामाप्रसाद मुखर्जी ट्रस्ट के मुख़र्जी भवन में पार्टी की गतिविधियां लगभग शून्य हो गई यहां तक की संगठनमंत्री का आवास भी मुखर्जी भवन की जगह 38 रेसकोर्स रॉड स्थित सरकारी बंगले पर स्थानांतरित कर दिया गया। चूंकि अब चुनाव आयोग ने सरकारी बंगले से किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों को रोकने के आदेश दिए हैं । ग्वालियर में भाजपा को 38 रेसकोर्स रॉड के कार्यालय पर अपनी गतिविधियों को बंद करना होगा जो पार्टी के लिए परेशानी का कारण बन जाएगा।

उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों पर नकेल कसना शुरू कर दिया है। आयोग ने हाल ही में पोस्टर, बैनर लगाने पर आदेश जारी किए थे। अब आयोग के एक और फैसले के आने से पहले नेताओं, मंत्रियों की नींद उड़ी है। दरअसल, मंत्री, विधायक और जनप्रतिनिधि अपने बंगले में चुनावी बैठक नहीं कर पाएंगे।  पार्टी प्रचार के लिए अपने बंगले पर झंडे-बैनर सहित अन्य चुनावी सामग्री भी नहीं लगा सकेंगे।

अगर आयोग को इस बारे में कोई शिकायत मिलती है तो वह ऐसा करने पर आचार संहिता उल्लंघन की कार्रवाई करेगा। आयोग जल्द ही इस के आदेश जारी करने वाला है। आयोग ने जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों की चुनावी गतिविधियों पर नजर रखना शुरू कर दिया है।  चुनाव से पहले यह देखा जा रहा है कि 50 हजार से अधिक राशि किन किन बैंक अकाउंट में बार बार डाली जा रही है।

दलाल कुरियर आदि के माध्यम से होने वाले अवैध धन के लेन देन पर अभी से कड़ी नजर रखी जा रही है। चुनाव के दौरान दिखावे के खर्च पर भी इन टीम की नजर रहेगी। उन राजनीतिक दल की भी सूची तैयार होगी जिन्होंने नियमित रूप से इनकम टैक्स नहीं भरा है। गौरतलब है कि साल के अंत में प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सभी दल अपनी अपनी तैयारियों को लेकर बैठकें कर रहे हैं।

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