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अब टॉर्चर नहीं कर पाएगी पुलिस सुप्रीम कोर्ट का निर्देश देश के हर थाने में CCTV कैमरे लगवाए जाएं

पुलिस स्टेशनों में आरोपियों को टॉर्चर करने के आरोपों के लिहाज से सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने बुधवार को कहा कि सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश के हर थाने में CCTV कैमरे लगवाए जाएं।

केंद्र सरकार भी हर उस जांच एजेंसी के ऑफिस में CCTV कैमरे लगवाना तय करे, जिसे पूछताछ और गिरफ्तारी का अधिकार है। इनमें CBI, ED, NCB और NIA समेत दूसरी एजेंसियां भी शामिल हैं।

थाने का हर कोना कैमरे की नजर में हो

जस्टिस आरएफ नरिमन की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि राज्यों और यूनियन टेरेटरीज को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर एक पुलिस स्टेशन में CCTV कैमरे लगाए जाएं।

इन्हें एंट्री, एग्जिट, मेन गेट, सभी लॉकअप और गलियारों, लॉबी, रिसेप्शन और बाहरी एरिया में लगाया जाना चाहिए। ऐसी कोई जगह न हो, जो कैमरे की रेंज से बाहर हो। कोर्ट ने साफ किया कि CCTV के मेंटिनेंस और रिकॉर्डिंग की जिम्मेदारी पुलिस स्टेशन के SHO की होगी।

नाइट विजन से लैस हों कैमरे

  • कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि CCTV सिस्टम को नाइट विजन से लैस किया जाना चाहिए।
  • इसमें ऑडियो के साथ वीडियो फुटेज का सिस्टम भी होना चाहिए।
  • सरकारें ऐसा सिस्टम खरीदें जिससे ज्यादा से ज्यादा समय के लिए डेटा स्टोरेज किया जा सके।
  • स्टोरेज हर हाल में एक साल से कम नहीं होना चाहिए।
  • केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए ऐसा करना अनिवार्य होगा।

केंद्र सरकार को दिए निर्देश

ताजा फैसले में कोर्ट ने कहा कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस समेत ज्यादातर जांच एजेंसियां अपने ऑफिसों में पूछताछ करती हैं।

जस्टिस केएम जोसफ और अनिरुद्ध बोस ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि इन सभी के ऑफिसों में CCTV कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाने चाहिए, जहां इस तरह की पूछताछ होती है या आरोपी रखे जाते हैं।

कोर्ट ने कहा कि इन निर्देशों से संविधान के आर्टिकल-21 में देश के हर नागरिक को मिले बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

कस्टडी में टॉर्चर पर सुनाया था फैसला

कोर्ट ने यह निर्देश परमवीर सिंह सैनी की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए। परमवीर सिंह ने थानों में CCTV कैमरे लगाने और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग किए जाने का मुद्दा उठाया था। कोर्ट ने इसी तरह का एक फैसला 15 जुलाई 2018 में सुनाया था।

कोर्ट ने 2017 में भी पुलिस कस्टडी में टॉर्चर करने से जुड़े एक मामले में थानों में CCTV कैमरे लगाने का आदेश दिया था। इसका मकसद मानवाधिकारों के हनन के आरोपों की जांच करना और मौके की वीडियोग्राफी करना था। साथ ही हर राज्य और यूनियन टेरिटरी में एक सेंट्रल ओवरसाइट कमिटी बनाना था।

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