कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी के रूप में मनाया जाता है। इसे आवंला नवमी भी कहते हैं। इस आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु वास आंवले में होता है।माना जाता है कि अक्षय नवमी पर मां लक्ष्मी ने पृथ्वी लोक में भगवान विष्णु एवं शिव जी की पूजा आंवले के रूप में की थी और इसी पेड़ के नीचे बैठकर भोजन ग्रहण किया था। यह भी कहा जाता है कि आंवले के पेड़ के नीचे श्री हरि विष्णु के दामोदर स्वरूप की पूजा की जाती है।
भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने कंस वध से पहले तीन वनों की परिक्रमा की थी। इस वजह से अक्षय नवमी पर लाखों भक्त मथुरा-वृदांवन की परिक्रमा भी करते हैं।अक्षय नवमी की पूजा की संतान प्राप्ति एवं सुख, समृद्धि एवं कई जन्मों तक पुण्य क्षय न होने की कामना से किया जाता है। इस दिन लोग परिवार सहित आंवला के पेड़ के नीचे भोजन तैयार कर ग्रहण करते हैं। उसके उपरांत ब्राह्मणों को द्रव्य, अन्न एवं अन्य वस्तुओं का दान करते हैं।नवमी तिथि पर महिलाएं शुभ मुहूर्त में आंवले के पेड़ की 108 परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत लपेट कर परिवार के सुख, समृद्धि के लिए आशीर्वाद लेती हैं।