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इधर फ्रांस में मोदी और ट्रम्प की मुलाकात के बाद कश्मीर पर मध्यस्थता की अटकलें समाप्त उधर बौखलाया पाकिस्तान

बियारिट्ज (फ्रांस): फ्रांस के बियारिट्ज में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात ने कश्मीर मुद्दे पर अमेरिकी मध्यस्थता की तमाम अटकलों पर पूर्ण विराम लगा दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां कश्मीर समेत भारत-पाक के सभी मुद्दों को द्विपक्षीय बातचीत का मसला करार दिया वहीं बीते कुछ हफ्तों के दौरान कश्मीर मामले पर मध्यस्थता को लेकर दिलचस्पी दिखा चुके ट्रंप ने भी माना कि इस मुद्दे को दोनों देश आपस में ही सुलझाएं तो बेहतर होगा.

 

विदेश सचिव विजय गोखले के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच करीब 40 मिनट की मुलाकात बेहतरीन और गर्मजोशी से भरी रही. इसमें दोनों देशों के बीच व्यापाक रणनीतिक साझेदारी के कई मुद्दों पर चर्चा हुई. वहीं गोखले ने साफ किया कि कश्मीर या पाकिस्तान के विषय पर दोनों नेताओं ने जो भी कुछ कहा वो कैमरों के सामने ही था. कैमरे हटने के बाद हुई वार्ता में इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई.

प्रधानमंत्री मोदी को अपना अच्छा दोस्त बताने वाले ट्रंप का बदला रुख भारत के लिए राहत की खबर था. क्योंकि ट्रंप ने महज दो महीने पहले जापान के ओसाका में हुई मुलाकात को लेकर जो गुगली फेंकी थी उसने कुछ देर के लिए तो भारत-अमेरिका रिश्तों में भूचाल सा ला दिया था. ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के साथ अपनी मुलाकात के बाद दावा किया था कि भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें कश्मीर पर मध्यस्थता की पेशकश की थी. इस मामले पर भारत के दो-टूक स्पष्टीकरण के बावजूद ट्रंप इस मामले पर यदा-कदा बयान देते रहे.

मोदी-ट्रंप मुलाकात के पहले ही अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि राष्ट्रपति कश्मीर में हालात सुधारने के लिए हो रही कोशिशों पर प्रधानमंत्री से सुनने में दिलचस्पी रखते हैं. हालांकि पीएम मोदी से मुलाकात के वक्त ट्रंप ने खुद कहा कि रविवार को कश्मीर के मुद्दे पर उनकी भारतीय प्रधानमंत्री से चर्चा हुई. ट्रंप के मुताबिक पीएम ने उन्हें बताया कि वो कश्मीर में हालात को सामान्य बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं. उम्मीद है कि इससे अच्छे नतीजे निकलेंगे.

फिर गुलाटी भी मार सकते हैं ट्रंप
अपने बयानों को बदलने का अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का रिकॉर्ड काफी समृद्ध है. ऐसे में ट्रंप ने कश्मीर पर मध्यस्थता राग से परहेज भले ही किया हो मगर इस संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता कि अमेरिकी राष्ट्रपति इस मामले पर पलटी भी मार सकते हैं. हालांकि पर्दे के पीछे अमेरिका के साथ चल रहे संवाद में भारतीय खेमा अमेरिकी प्रशासन को यह बता चुका है कि इस मामले पर वाशिंगटन का दखल रिश्तों की रेल को गड़बड़ा सकता है. ऐसे में बेहतर होगा कि अमेरिका आतंकवाद पर पाकिस्तान के पिछले रिकॉर्ड पर ध्यान देते हुए आगे बढ़े. जाहिर है पेशे से कारोबारी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप यह जानते हैं कि भारत की कीमत पर पाकिस्तान से रिश्तों में निवेश घाटे का सौदा साबित हो सकता है.

बौखलाए इमरान खान ने फिर दी परमाणु युद्ध की धमकी
जाहिर है महज एक महीने बाद ट्रंप को प्रधानमंत्री मोदी के साथ दोस्ती पर रश्क जताते देखना पाकिस्तानी पीएम इमरान खान की परेशानी बढ़ाने को काफी है. यही वजह है कि मोदी-ट्रंप मुलाकात के थोड़ी ही देर में इमरान खान ने देश के नाम संदेश में परमाणु हथियारों का बिजूका लहराने में देर नहीं लगाई. अमेरिका का ध्यान खींचने को बेताब इमरान ने कहा कि यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत और पाकिस्तान परमाणु ताकत हैं. पाकिस्तान कश्मीर के लिए किसी भी हद तक जाएगा और हालात परमाणु युद्ध तक जाती है तो ऐसे में विश्व शक्ति की एक जिम्मेदारी है.

 

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