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एससी एसटी एक्ट को लेकर आज भी जारी रहा प्रदर्शन ग्वालियर व डबरा में हुआ बवाल

पुलिस प्रशासन ने सोशल मीडिया पर तरेड़ी आंखें,धारा 144 लगाने की तैयारी
अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किए गए संशोधन के खिलाफ सामान्य वर्ग भड़क चुका है और पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन का दौर जारी है। सांसद/मंत्री और विधायकों का घेराव किया जा रहा है। हालात यह हैं कि ग्वालियर के सभी दिग्गजों ने रविवार को अपने सभी दौरे और कार्यक्रम निरस्त कर दिए। आज सुबह ग्वालियर में प्रदेश सरकार की मंत्री मायासिंह का विरोध करने की कोशिश कर रहे कुछ लोगों को पुलिस ने धर दबोचा।  उधर सवर्ण समाज पार्टी,ओबीसी प्रतिनिधियों और भारतीय जन युग पार्टी ने रविवार को केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बंगले का घेराव कर प्रदर्शन किया। हालांकि केंद्रीय मंत्री ग्वालियर में नहीं थे। लेकिन अपना विरोध जताने पहुंचे लोगों ने करीब आधा घंटा तक उनके बंगले का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से इस्तीफा भी मांगा ।  वहीीं डबरा से खबर आ रही है कि एक्ट के खिलाफ सवर्ण समाज के युवाओं ने अर्धनग्न प्रदर्शन किया।
इस विरोध प्रदर्शन कि सबसे खास बात यह रही कि जब युवा रोड पर आकर बाजार में निकले तो बाजार में निकल रहे आम लोग भी इस आंदोलन में शामिल हो गए, जिसका यह अनुमान भी लगाया जा सकता है कि कहीं न कहीं सभी सवर्ण समाज के लोगों में इस एक्ट को लेकर सरकारों से अंदरूनी नाराजगी है जो आमजन द्वारा धीरे धीरे रोड पर आकर आंदोलन का रूप लेती जा रही है। 
उधर विरोध प्रदर्शन व घेराव की आशंका के मद्देनजर अंचल के तमाम नेताओं के घरों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस प्रशासन ने भी सोशल मीडिया पर कड़ी नजर रखते हुए इस विषय पर भड़काऊ पोस्ट न डालने की चेतावनी जारी कर कार्यवाही की धमकी दी है।
उधर ग्वालियर में 4 सितम्बर को आयोजित किये जा रहे स्वाभिमान सम्मेलन ने भी पुलिस प्रशासन के लिए समस्या खड़ी कर दी है। यह सम्मेलन ग्वालियर में लक्ष्मबाई की समाधि के समीप मैदान पर प्रस्तावित है। सूत्रों का कहना है कि जिस प्रकार अंचल में माहौल गर्माया हुआ है उसको देखते हुए इस सम्मेलन में बड़ी भीड़ जमा होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
इतना ही नहीं 6 सितम्बर के भारत बंद को भी पूरे अंचल में व्यापक समर्थन देखा जा रहा है। पुलिस प्रशासन इस बात को लेकर चिंतित है कि भारत बंद के दौरान  माहौल उत्तेजनापूर्ण न बन जाए।
सूत्रों का कहना है कि किसी भी तनावपूर्ण स्थिति को टालने के लिए पुलिस प्रशासन धारा 144 के साथ सोशल मीडिया को प्रतिबंधित करने के लिए इंटरनेट सेवाओं को सीमित करने जैसे कदम उठाने की तैयारी में है।
आंदोलन कर रहे युवाओ की एक ही मांग है कि केंद्र की मोदी सरकार ने जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में जो अध्यादेश लाकर बदलाब किया है उसे बापस करे नहीं तो आगे और भी उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।
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