Homeग्वालियर अंचलबर्फीली हवाओं और घने कोहरे की चपेट में ग्वालियर चंबल अंचल

बर्फीली हवाओं और घने कोहरे की चपेट में ग्वालियर चंबल अंचल

मध्यप्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत में इस समय कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। ग्वालियर चंबल अंचल में गुरुवार की सुबह कोहरे के कारण जन जीवन अस्त व्यस्त दिखाई दिया दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच सूर्य देव ने दर्शन दिए लेकिन 4 बजते बजते बर्फीली हवाओं के बीच घने कोहरे ने डेरा डाल लिया । उधर दिल्ली भोपाल रूट की कई रेल गाड़ियों पर कोहरे का असर पड़ा है । कई रेलों को रद्द किए जाने की खबर है तो कई बहुत विलंब से चल रही हैं।

उधर देश के कई राज्यों में तापमान में तेजी से गिरावट देखने को मिल रही है। ग्वालियर सहित मध्यप्रदेश के कई शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे चला गया है।

ग्वालियर चंबल अंचल में इस समय जोरदार सर्दी पड़ रही है। यहां गुरुवार को  कोहरे की मोटी चादर देखने को मिल रही है। सुबह के समय से ही घना कोहरा देखने को मिल रहा है।

उधर यूपी, बिहार, हिमाचल, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में वजह से लोगों का बुरा हाल है। कोहरे की वजह से सुबह-सुबह कई जगहों पर जीरो विजिबिलिटी देखने को मिली शाम ढले ढलते  कोहरे ने फिर कोहराम मचाया और विजिबिलिटी बहुत कम मिल रही है। दिसंबर का महीना खत्म होने वाला है, ऐसे में सर्दी ने नए साल से पहले ही अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। जनवरी के महीने में खूब शीतलहर का भी असर देखने को मिलेगा।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने उत्तर पश्चिम भारत में अगले 3-4 दिनों तक लगातार घना कोहरा छाए रहने की संभावना जताई है। पंजाब के अधिकांश हिस्से, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और यूपी के कुछ क्षेत्र में अधिक ठंड पड़ने की संभावना जताई गई है। इसके अतिरिक्त, जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पश्चिमी राजस्थान और उत्तर-पश्चिमी मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भी घने कोहरे होने की संभावना है।

मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा सहित कई राज्यों के लिए कोहरे को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम वैज्ञानिकों का दावा है कि अगले एक हफ्ते के दौरान हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर में बर्फबारी भी देखने को मिल सकती है, यदि ऐसा हुआ तो इन राज्यों में और भी अधिक ठंड महसूस की जा सकती है। 31 दिसंबर से 2 जनवरी तक उत्तर भारत में बारिश की भी संभावना है, जिसकी वजह से कड़ाके की सर्दी पड़ सकती है। इसका असर मध्यप्रदेश में भी देखने को मिलेगा।

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