चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस खानविलकर ने कहा कि ये गिरफ्तारियां राजनीतिक असहमतियों की वजह से नहीं हुईं, बल्कि प्रथम दृष्टया ऐसे साक्ष्य मिलते हैं, जिससे माओवादियों के साथ उनके संबंधों के बारे में पता चलता है
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एसआईटी जांच की अपील खारिज करते हुए पुणे पुलिस को मामले की जांच जारी रखने को कहा है
-शीर्ष अदालत ने हालांकि एक्टिविस्ट्स को राहत के लिए निचली अदालत में अपील करने की अनुमति दी
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वालों में इतिहासकार रोमिला थापर के अतिरिक्त अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक व देवकी जैन, समाजशास्त्र के प्रोफेसर सतीश देशपांडे और मानवाधिकारों की पैरवी करने वाले माजा दारुवाला भी शामिल हैं। उन्होंने एक्टिविस्ट्स की तत्काल रिहाई के साथ-साथ इस मामले की स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग भी की थी।
इतिहासकार सहित अन्य बुद्धिजीवियों ने इनके खिलाफ आरोपों को मनगढ़ंत बताया। लेकिन कोर्ट ने कहा कि आरोपियों और माओवादियों के बीच संंपर्क के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलते हैं। इससे पहले कोर्ट ने 20 सितंबर को इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। महाराष्ट्र पुलिस ने एक्टिविस्ट्स को 28 अगस्त को गिरफ्तार किया था और वे 29 अगस्त से ही अपने घरों में नजरबंद हैं।