केन्द्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश ना मानते हुए एट्रोसिटी अमेंडमेंट एक्ट लागू करने, मप्र सरकार द्वारा हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद प्रमोशन में आरक्षण समाप्त ना कर पात्र शासकीय सेवको को प्रमोशन से वंचित रखे जाने तथा विभिन्न योजनाओं को बिना जातिगत भेदभाव के आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग को लेकर प्रदेश के सपाक्स समाज में आक्रोश है। केन्द्र सरकार और मप्र सरकार के सपाक्स वर्ग के प्रति लगातार उपेक्षित रवैये को देखते हुए सभी संगठन राजधानी भोपाल में 30 सितंबर को क्रांति रैली और आमसभा करने जा रही है।
विरोध कर रहे सपाक्स का आरोप है कि बीते दिनों मुख्यमंत्री शिवराज द्वारा केवल चुनावी लाभ लेने के लिए दिया गया बयान कि बिना जांच के एट्रोसिटी एक्ट में कोई गिरफ्तारी नहीं होगी, असंवैधानिक तथा हास्यास्पद है। मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए इस बयान से ऐसा प्रतीत होता है कि वे चौथी बार सरकार बनाने के चक्कर में अपने संवैधानिक दायित्वों को भी भूल चुके हैं। मप्र में लगातार सपाक्स वर्ग एवं सहयोगी संगठनो द्वारा किए जा रहे आंदोलन के चलते मुख्यमंत्री इस प्रकार के बयान देकर वोट हथियाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं 2002 में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा लिए गए प्रमोशन में आरक्षण के निर्णय पर मुख्यमंत्री शिवराज द्वारा केवल आरक्षित वर्ग के अधिकारियों व कर्मचारियों का साथ दिया जा रहा है।
सपाक्स का कहना है कि सरकार ने जबलपुर हाईकोर्ट द्वारा 30.04.2016 को पारित निर्णय कि प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था समाप्त की जाए के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट की युगल पीठ में याचिका लगा रखी है। यह दर्शाता है कि प्रदेश की भाजपा सरकार समरसता के खोखले दावों के बीच केवल एक वर्ग के लिए चिंतित है। पूर्व में भी कांग्रेस की सरकारों ने केवल एक वर्ग के हितों पर कार्य किया था, जिसे शिवराज सिंह चौहान की सरकार आगे बढ़ा रही है।
बता दे कि 6 सितंबर को मध्यप्रदेश के साथ पूरे देश में सपाक्स समाज ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर अभूतपूर्व भारत बंद किया था। इसके अलावा प्रदेश भर में लगातार रैलियां और आमसभा कर आंदोलन भी कर विरोध जताया था। इसके बावजूद भी केन्द्र सरकार ने एट्रोसिटी एक्ट जैसे काले कानून को वापिस लेने का अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। यहां तक कि 25 सितंबर को भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे पीएम मोदी ने भी इस संबंध में अपने भाषण में कोई चर्चा नहीं की। जिसके कारण सपाक्स में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और वे अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में है।