आइए जानते हैं इन 4 योगासनों के बारे में जो शरीर पर आपका संतुलन बनाने में मदद करेंगे :
अनुलोम-विलोम (Breathing exercise) :अनुलोम विलोम प्राणायाम मस्तिष्क में संतुलन लाता है। यह हमारी विचार करने की शक्ति और भावनाओं में समन्वय लाता है। प्राणायाम के दौरान जब हम गहरी सांस भरते हैं तो शुद्ध वायु हमारे खून के दूषित पदार्थों को बाहर निकाल देती है।
इसे करने के लिए पद्मासन में बैठ जाएं। इस तरह बैठना संभव न हो तो कुर्सी पर अपनी रीढ़, कमर और गर्दन को सीधा रखते हुए बैठें। दाहिने हाथ की नसाग्र मुद्रा बनाएं। इसके लिए दाएं अंगूठे से दाईं नासिका को बंद करें और बाईं नासिका से इस प्राणायाम की शुरुआत करें। पहली दो उंगलियों को बिंदी वाले स्थान पर रखें। बाईं हथेली को बाएं घुटने पर ज्ञान मुद्रा में अर्थात अंगूठे और पहली उंगली के अग्रभाग को मिलाकर रखें। बाकी की तीन उंगलियां खुली रखें।
अब बाईं नाक से गहरी सांस भरें और इसी नाक से पूरी सांस धीरे-धीरे बाहर निकाल दें। इसके बाद अनामिका यानी तीसरी उंगली से बाईं नासिका को बंद कर दीजिए। पांच बार दाईं नासिका से गहरी सांस भरिए और दाईं नासिका से ही नियंत्रणपूर्वक सांस को बाहर निकाल दीजिए। अभ्यास के दौरान साँस लेने और छोड़ने की आवाज नहीं होनी चाहिए न ही सांस रोकनी है। इसके बाद दाएं हाथ से यही प्रक्रिया दोहराएं।
ताड़ासन (Mountain Pose) : ताड़ासन योग मुद्रा पैर से लेकर दोनों भुजाओं और शरीर में खिंचाव लाने के लिए और लंबाई बढ़ाने के लिए बहुत ही प्रभावी होता है। इसके अलावा भी यह आसन करने से शरीर को कई फायदे होते हैं। यह विभिन्न विकारों से हमें दूर रखता है।
ताड़ासन दिन में किसी भी समय कर सकते हैं। लेकिन भोजन करने के बाद ही अगर यह आसन करना चाहते हैं तो करीब चार से छह घंटे पहले भोजन कर लें। इसके अलावा यदि आपने ताड़ासन को पहले कभी नहीं किया है और अभी शुरुआत करने जा रहे हैं तो आपको धैर्य के साथ धीरे-धीरे इसका अभ्यास करना चाहिए। एकदम से काफी देर के लिए पंजों के बल खड़े होने से तकलीफ हो सकती है।
फर्श पर एकदम सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी बनाए रखें। इसके बाद अपने हाथों को शरीर से छूते हुए बिल्कुल खुला लटकाए रखें। हाथों में किसी तरह का तनाव न हो और ना ही आपकी मुट्ठी बंद हो। अब सांस लेते हुए अपने दोनों भुजाओं को ऊपर उठाएं और हाथों की उंगलियों को एक दूसरे से इंटरलॉक कर लें। इसके बाद अपनी एड़ियों को उठाएं और पैर की उंगलियों के सहारे खड़े हो जाएं। अब पैरों से लेकर उंगलियों और शरीर में खिंचाव को महसूस करें। सांस लेते हुए इस मुद्रा में कुछ देर तक बने रहें। अब सांस को छोड़ते हुए विश्राम की मुद्रा में आ जाएं। धीरे-धीरे करते हुए इस मुद्रा को कम से कम 10 बार दोहराएं।
ऊर्ध्व हस्तानासन (Upward Salute) : ऊर्ध्व हस्तानासन का मतलब है उठे हुए हाथों की मुद्रा। इस आसन का अभ्यास आपको मानसिक और शारीरिक लाभ देता है। इसे करने के लिए अपने दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी बनाकर सीधे खड़े हो जाएं। हाथों को इस तरह रखें कि आपकी हथेलियां सामने की ओर खुली रहें। गहरी सांस भरें और हाथों को सिर के ऊपर छत की ओर लेकर जाएं। अगर आपके कंधों में कसावट है तो हाथों के सिर के ऊपर समानांतर आने पर रुक जाएं। दोनों हथेलियों को जोड़ने का प्रयास करें। अगर न हो रहा हो तो रहने दें। अपनी गर्दन को ऊपर उठाकर अंगूठे की ओर देखें और सिर को पीछे के ओर आराम से लेकर जाएं। इस अवस्था में कुछ देर गहरी सांस लें। सांस बाहर छोड़ें और हाथों को बाजू से शुरुआती मुद्रा में ले आएं। अब कमर को आगे झुकाकर उत्तानासन में आ जाएं। गर्दन या कंधे की चोट होने पर इस आसन को न करें।
उत्तानासन (Standing forward bend) :उत्तानासन का मतलब स्ट्रैच पोज होता है। यह आसन करने से शरीर को बहुत फायदे होते हैं। इस आसन को करने के दौरान आपका सिर आपके हृदय के नीचे होता है। जिससे आपके पैरों के बजाय आपके सिर में रक्त परिसंचरण होता है। साथ ही आपकी कोशिकाओं को ऑक्सीजन पहुंचता है।
इसे करने के लिए खड़े हो जाएं और अपने हाथ सीधे करके दोनों ओर रखें। अब सांस छोड़ते हुए सामने की ओर झुकते हुए सिर को नीचे की ओर लेकर जाएं। जितना नीचे आराम से जा सकते हैं, उतना अच्छा रहता है। अपनी दोनों हथेलियों से जमीन को छूते हुए कुछ देर इसी अवस्था में रुकें। ध्यान रहे इस आसन को करते हुए आपके दोनों घुटने सीधे रहने चाहिए। अपने हाथों को अपने पैरों के आगे फर्श पर आराम करने दें। अब धीरे-धीरे वापस सीधे खड़े होने की अवस्था में आ जाएं।