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मामाजी ने स्थापित किए श्रेष्ठ पत्रकारिता के मानक

 

_मामाजी माणिकचंद्र वाजपेयी के जयंती प्रसंग पर विश्व संवाद केंद्र में व्याख्यान एवं संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त “मध्य भारत में संघ की विकास यात्रा” विशेषांक का विमोचन किया गया।_

भोपाल 7 अक्टूबर 2026/मामाजी माणिकचंद्र वाजपेयी की 107वीं जयंती प्रसंग पर विश्व संवाद केंद्र, मध्यप्रदेश की ओर से 7 अक्टूबर को विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस आयोजन में बतौर मुख्य वक्ता माधव सिंह दांगी ने मामाजी माणिकचंद्र वाजपेयी की पत्रकारिता को याद करते हुए ‘राष्ट्रहित और पत्रकारिता’ विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व संवाद केंद्र न्यास के अध्यक्ष लाजपत आहूजा ने की।

सामाजिक कार्यकर्ता एवं अर्चना प्रकाशन के उपाध्यक्ष माधव सिंह दांगी ने कहा कि संवाददाता की दृष्टि कैसी है, इसका प्रभाव उसके द्वारा बनाए समाचार के माध्यम से समाज पर पड़ता है। समाचार लिखते समय एक पत्रकार को यह याद रखना चाहिए कि उस समाचार का प्रभाव समाज और राष्ट्र पर क्या पड़ेगा। मामाजी कहते थे कि समाचार निष्पक्ष होना चाहिए। अगर पत्रकार की कोई विचारधारा है तो उसकी छाप समाचार पर नहीं होनी चाहिए। किसी घटना को लेकर उसे अपने विचारों की अभिव्यक्ति करनी है तो वह लेख लिखे, विश्लेषण करे। लेख के माध्यम से एक पत्रकार को अपने विचारों को प्रकट करने की पूरी स्वतंत्रता है।

देश और राष्ट्र की संकल्पना को स्पष्ट करते हुए श्री दांगी ने कहा कि भौगोलिक सीमाएं देश बनाती हैं और संस्कृति राष्ट्र का निर्माण करती है। जब इजराइल एक देश के रूप में नहीं था, तब भी यहूदियों के मन में उनका राष्ट्र जीवित हैं। वे जब भी एक-दूसरे से विदा लेते थे तो कहते थे- अगली सुबह इजराइल में होगी।

सादा जीवन-उच्च विचार के जीवंत प्रतीक 
मामाजी से जुड़े आत्मीय प्रसंगों का स्मरण करते हुए श्री दांगी ने कहा कि मामाजी सब प्रकार के कार्यों को समान महत्व देते थे। वे छोटे-छोटे कार्य करके दूसरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करते थे। युवा पत्रकारों एवं लेखकों को सिखाने का काम भी वे करते थे। उन्होंने कहा कि परमहंस की दृष्टि में कोई दोष नहीं होता। मामाजी को मैं परमहंस की श्रेणी में मानता हूं। ‘सादा जीवन-उच्च विचार’ के जीते-जागते प्रतीक थे। देह से ऊपर उनके विचार थे। बाहरी वेशभूषा को लेकर वे बहुत सजग नहीं थे लेकिन विचारों और व्यवहार को लेकर बहुत सजग रहते थे।

पत्रकारिता के श्रेष्ठ मानक किए स्थापित 
कार्यक्रम के अध्यक्ष लाजपत आहूजा ने कहा कि मामाजी ने किसी संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई नहीं की थी, लेकिन उन्होंने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से श्रेष्ठ मानक स्थापित किए। एक बार कांग्रेस के एक नेता के नर्स के साथ आपत्तिजनक फ़ोटो सामने आए। पत्रकार ने उस पर एक समाचार भी तैयार किया। लेकिन मामाजी ने उस समाचार और उन फ़ोटो को प्रकाशित होने से रोक दिया। उन्होंने कहा कि जब हमारा समाचार पत्र परिवारों में पहुंचेगा तो वहां इसका अच्छा प्रभाव नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि आपातकाल में मामाजी को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया।

उन्होंने कहा कि मामाजी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी प्रामाणिक पुस्तकें लिखीं, जिनमें- आपातकाल का संघर्ष, मध्यभारत की संघगाथा, ज्योति जला निज प्राण की – प्रमुख हैं। उनकी लेखनी के कारण संघ की कई महत्वपूर्ण जानकारी हमारे सामने है।

‘मध्यभारत में संघ विकास की यात्रा’ का विमोचन 
विश्व संवाद केंद्र ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के प्रसंग पर एक विशेषांक ‘मध्यभारत में संघ विकास की यात्रा’ तैयार किया है। आज इस विशेषांक का भी विमोचन किया गया। इसमें मध्यभारत में संघ कार्य के विकास की जानकारी है। विशेषांक का संपादन लेखक डॉ. लोकेन्द्र सिंह ने किया है। कार्यक्रम के अंत में आभार ज्ञापन न्यास के सचिव डॉ. लोकेन्द्र सिंह ने और संचालन पत्रकारिता की विद्यार्थी आराधना मौर्य ने किया।

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