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मोदी की जबरदस्त लोकप्रियता ने भाजपा के लिए पैदा किये 2014 से भी बेहतर हालात,विपक्ष हैरान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विराट रोड शो से चंद घण्टे पूर्व जिस काशी से कांग्रेस अपने  सबसे प्रभावी व चमकदार चेहरे प्रियंका गांधी को मोदी के सामने चुनावी रण में उतारने की बात  कर रही थी वही कांग्रेस अब बीच युद्ध में चुनावी रण छोड़कर दूर भागती नजर आ रही है। भय और निराशा का आलम यह है कि  सौ साल से ज्यादा पुरानी हो चुकी कांग्रेस को चुनावी रण में मोदी के सामने मुकाबला करने के लिए इतना दमदार चेहरा तक नहीं मिल सका जिसे चुनाव में उतारकर कांग्रेस केवल मजबूत वैचारिक सन्देश देने का काम कर पाती। कितने आश्चर्य की बात है जहां से कांग्रेस अपनी स्टार वुमेन प्रियंका को लड़ाकर बड़ी बड़ी बातें कर रही थी वहां से अब एक पिटे पिटाये  प्रत्याशी को उतारकर  अपने हास परिहास का कारण बन गई है।

 

आखिर कांग्रेस के इस कदम को किस नजरिए से देखा जाए ? इस बारे में आज विचार करना बेहद जरूरी है। काशी में मोदी के सामने से प्रियंका गांधी का इस प्रकार से भाग खड़े होना साफतौर पर इस बात का संकेत है कि कांग्रेस प्रधानमंत्री मोदी के सामने हथियार डाल चुकी है। जिस उत्तरप्रदेश में बुआ बबुआ गठबंधन से नकारे जाने के बाद राहुल गांधी हम किसी से कम नहीं की हुंकार भर रहे थे आज आलम यह है कि उसी उत्तरप्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी के सामने खड़ा करने के लिए उन्हें अच्छा प्रत्याशी तक नहीं मिल सका, वही प्रत्याशी मिला जो 2014 में मोदी के सामने मात्र 75 हजार वोट हासिल करके अपनी जमानत तक नहीं बचा सका था।

 

राजनीतिक पण्डितों की मानें तो अब जबकि तीन चरण का चुनाव हो चुका है और मोदी का जादू जिस प्रकार से देशवासियों के सर चढ़कर बोल रहा है ऐसे वक़्त मोदी के सामने चुनाव लड़कर उनको चुनौती देने की बात करने वाली कांग्रेस ने काशी में जो फिसड्डी पन दिखाया है उसका असर अब सम्पूर्ण उत्तरप्रदेश बिहार पर तो पड़ेगा ही साथ ही अब जहां जहां भी चुनाव होना है वहां मोदी की आंधी सुनामी में तब्दील हो जाएगी जिसे रोक पाना अब न तो महागठबंधन के द्वारा सम्भव नजर आता है न राहुल प्रियंका के ।

 

काशी में मोदी के दो दिन के कार्यक्रम ने उत्तरप्रदेश में तो जैसे गेम चेंजर का काम किया है। इसके बाद यहां कमोबेश अब हालत 2014 के चुनाव जैसे ही नजर आने लगे हैं। मोदी की आँधी देख जहां विपक्ष घबराया हुआ नजर आ रहा है वहीं जो वोटर असमंजस की हालात में  था  अब मोदी के पक्ष में मन बनाता दिखाई दे रहा है।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का मत है कि काशी को पूर्वांचल की राजनीतिक राजधानी कहा जाता है। मोदी ने बड़ी चतुराई से यहां अपना विराट शक्तिप्रदर्शन करके सीधे सीधे पूर्वांचल की 20 ओर यहां से सटी हुई बिहार की 4 लोकसभा सीटों अर्थात कुल 24 सीटों पर विरोधियों का मनोबल पूरी तरह तोड़कर रख दिया है। यह आलम उस वक्त है जब अभी मतदान में एक पखवाड़े से भी अधिक समय बचा है। इतना ही नही विपक्ष के सर्वाधिक भरोसे वाले राज्यों पश्चिम बंगाल सहित दक्षिण और बिहार आसाम आदि में भी मोदी का जादू जिस प्रकार सर चढ़कर बोलता दिखाई दे रहा है वह विपक्ष को बड़ा झटका देने वाला कहा जा सकता है।

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