पिछले काफी समय से भाजपा ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की आलोचना करने वाले बागी नेता यशवंत सिन्हा ने पार्टी को छोड़ने को ऐलान कर दिया है। सिन्हा ने इस दौरान कहा कि मैं भाजपा का पद छोड़ रहा हूं। भाजपा के साथ सभी संबधों को आज समाप्त करता हूं, भविष्य में मैं किसी पद का दावेदार नहीं हूं। साथ ही उन्होंने कहा कि मैं आज के बाद किसी दल के साथ नहीं रहूंगा न ही किसी भी राजनितिक दल से कोई रिश्ता रखूंगा। आज से चार साल पहले ही मैं सक्रिय राजनीति से संन्यास ले चुका हूं और अब मैंने चुनावी राजनीति से खुद को अलग कर लिया है।
मोदी सरकार पर साधा निशाना
सिन्हा ने मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि आज लोकतंत्र खतरे में है इसे बचाने के लिए मैं आंदोलन करूंगा। भारतीय जनता पार्टी से मेरा रिश्ता खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि जब देश मुसीबत में था पटना ने रास्ता दिखाया था। आज भी देश को पटना ही रास्ता दिखाएगा। सिन्हा ने कहा कि गुजरात चुनाव के कारण संसद का सत्र छोटा किया गया देश में ऐसा कभी नहीं हुआ। हम देश की हालत पर विचार करने आए हैं, देश की परिस्थिति चिंताजनक है।
पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में राष्ट्र मंच के सम्मेलन को संबोधित करते हुए यशवंत ने कहा कि अभी जो स्थिति बन गई है इसमें सभी को एकजुट होने की जरूरत है। अगर हम आज एकजुट न हुए तो आने वाली पीढ़ी हमें इसके लिए माफ नहीं करेगी। उन्होंने देश में जारी कैश की किल्लत के लिए वित्त मंत्री अरूण जेतली और आरबीआई जिम्मेदार ठहराया। सिन्हा द्वारा पटना में बुलाई गई गैर भाजपा दलों की बैठक में शत्रुघ्न सिन्हा भी शामिल हुए। वहीं सम्मेलन में कांग्रेस की नेता रेणुका चौधरी, आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष और संजय सिंह व अन्य पार्टियों के कई नेता मौजूद थे।
विपक्षी दलों के साथ बैठक कर लिया फैसला
बता दें कि सिन्हा पिछले कुछ महीनों से मोदी सरकार पर तीखे हमले करते रहे हैं और कई मुद्दों पर सरकार को घेरा भी है। सिन्हा ने इसी साल 30 जनवरी को राष्ट्र मंच के नाम से एक नए संगठन की स्थापना की थी। तब उन्होंने कहा था कि यह संगठन गैर-राजनीतिक होगा और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर करेगा। शनिवार को विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक कर उन्होंने यह फैसला लिया।