प्रवीण दुबे
भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा के बाद अब ग्वालियर के तमाम भाजपा नेताओं कार्यकर्ताओं की निगाह जिला कार्यकारिणी पर टिकी हुई हैं यहां बताना उपयुक्त होगा कि भाजपा ग्वालियर महानगर पर नए अध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया की नियुक्ति को लगभग 9 माह का समय गुजर चुका है। पार्टी हाईकमान ने ग्वालियर में रायशुमारी का काम भी काफी पहले ही पूरा कर लिया है और इसकी रिपोर्ट भी पार्टी नेतृत्व को पहुंचा दी गई बावजूद इसके ग्वालियर नगर कार्यकारिणी की घोषणा करने की हिम्मत पार्टी नेतृत्व नहीं दिखा पाया है।
यहां हमने हिम्मत शब्द का इस्तेमाल इस कारण किया है क्यों कि ग्वालियर के बारे में पार्टी नेतृत्व को कोई भी कदम उठाने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व ग्वालियर के मामलों को जितना ज्यादा टाला जा सके इसी रणनीति पर काम करता है।

हाल ही में घोषित की गई प्रदेश कार्यकारिणी में भी पार्टी नेतृत्व ने ग्वालियर को डिस्टर्ब न करने का ही काम किया है जो जहां है वहीं रहने दो न कोई से दोस्ती न कोई से बैर।
शांति बनाए रखने के लिए पार्टी नेतृत्व की यह रणनीति ठीक कही जा सकती है लेकिन इस पार्टी नेतृत्व की इस अनदेखी ने जमीनी नेताओं कार्यकर्ताओं के मन में निराशा का भाव अवश्य पैदा कर दिया है।
जिला कार्यकारिणी से लेकर निगम मंडल आयोग प्राधिकरण आदि में नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही हैं? आखिर कबतक इनको टाला जाएगा? अंदर ही अंदर दबी जुबान कार्यकर्ताओं के बीच इसकी चर्चा सरगर्म है।
सर्वविदित है कि विधानसभा चुनाव हुए लगभग ढाई वर्ष का समय गुजर चुका है,जिला कार्यकारिणी से लेकर निगम मंडल आयोग सहित केंद्र के रेलवे दूरसंचार जैसे कई सरकारी उपक्रमों को मिला दिया जाए तो इतने पद खाली हैं कि पार्टी के अधिकांश कार्यकर्ताओं की नियुक्ति करके पार्टी नेतृत्व कुछ समय के लिए ही सही कार्यकर्ताओं को सत्ता में सहभागिता का अहसास तो करा ही सकता है। लेकिन सैकड़ों पद खाली होने के बावजूद पार्टी कार्यकाताओं की नियुक्ति न किया जाना यह सिद्ध करता है कि पार्टी के भीतर संगठन पर तमाम क्षत्रप हावी हैं और उनकी वज़ह से पार्टी नेतृत्व न तो कार्यकारिणी घोषित कर पा रहा है न नियुक्तियां करने का साहस दिखा पा रहा है।
सूत्रों की माने तो ग्वालियर की जिला कार्यकारिणी यहां के क्षत्रपों की चोदराहट के कारण ही घोषित नहीं हो पा रही है क्षत्रपों की दादागिरी के सामने पार्टी हाईकमान से लेकर जिलाध्यक्ष सब बेबस हैं।पार्टी के भीतर से जो जानकारी सामने आ रही है उसे सही माना जाए तो ग्वालियर में सक्रीय कम से कम चार क्षत्रपों द्वारा कार्यकारिणी हेतु अपने दर्जनों पट्ठों की सूची प्रेषित कर दी गई है।
यही वजह है पार्टी की रायशुमारी हो या फिर जिलाध्यक्ष के सुझाव अथवा पार्टी नेतृत्व का निर्णय सब एक कौने में धरे रह गए हैं। हालात यहां तक जा पहुंचे हैं कि किसी को समझ नहीं आ रहा करें तो करें क्या ?