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सावन का तीसार सोमवार है विशेष, इस दिन भोले बाबा को ऐसे करें प्रसन्न

सावन  का महीना हिंदू धर्म  का सबसे पवित्र महीना है, जोकि भगवान शिव को बहुत प्रिय है. साथ ही शास्त्रों में सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है. यही कारण है कि सावन में पड़ने वाले सोमवार के दिन का महत्व काफी बढ़ जाता है.

इस वर्ष सावन महीने की शुरुआत 22 जुलाई 2024 से हुई थी, जिसका समापन 19 अगस्त 2024 को होगा. सावन की शुरुआत और समाप्ति दोनों सोमवार के दिन ही होगी. ऐसे में इस बार सावन में कुल 5 सोमवार व्रत रखे जाएंगे. अब तक दो सावन सोमवार व्रत पूर्ण हो चुके हैं और 5 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार व्रत रखा जाएगा.

शिवजी की कृपा पाने के लिए इस दिन आप व्रत-पूजन कर सकते हैं. आइये जानते हैं सावन का तीसरा सोमवार व्रत की पूजा विधि, भोग, मंत्र और व्रत कथा के बारे में-

सावन महीने का तीसरा सोमवार व्रत 5 अगस्त 2024 को रखा जाएगा. यह सावन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि रहेगी. प्रतिपदा तिथि शाम 06:03 तक रहेगी फिर द्वितीया तिथि लग जाएगी. इस दिन व्यतीपात और वरीयान योग भी रहेगा. साथ ही आश्लेषा और मघा नक्षत्र भी रहेगा.

सावन के तीसरे सोमवार में इस तरह करें पूजा 

सावन के तसीरे सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहन लें. फिर भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. आप शिव मंदिर जाकर या घर पर ही सावन सोमवार की पूजा कर सकते हैं. पूजा के लिए आप सबसे पहले शिवजी का अभिषेक करें. इसके बाद भगवान को सफेद चंदन का तिलक जलाएं, फूल, फल और मिष्ठान का भोग लगाकर धूप-दीप जलाएं और फिर शिव मंत्रों का जाप करें.

पूजा में धतूरा, बेलपत्र और भांग जरूर अर्पित करें. सावन सोमवार की व्रत कथा पढ़ें और आखिर में भगवान शिव की आरती करें. सावन सोमवार पर पूरे दिन व्रत रखें या फलाहार रहें.

भगवान शिव को लगाएं इन चीजों का भोग 

सावन सोमवार की पूजा में भगवान शिव को आप हलवा, दही, भांग, पंचामृत, शहद, दूध, खीर, मालपुआ और ठंडाई आदि का भोग लगा सकते हैं. ये सभी भगवान शिव के प्रिय भोग हैं. भोग लगाते समय इस मंत्र का जाप करें-

त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।

इन मंत्रों का करें जाप  

  • ॐ नमः शिवाय॥
  • ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
    उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
  • ॐ नमो भगवते रूद्राय।
  • ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
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