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भागवत के बयान पर नेहरू व जिन्नावादी सोच के नेताओं को क्यों लगी मिर्ची ?

  प्रवीण दुबे
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा हिंदुत्व और लिंचिंग को लेकर दिए बयान के बाद कट्टरवादी मुल्ला मौलवी और दिग्विजयसिंह जैसे नेताओं में खलबली मच गई है। इस बयान ने जहां एकबार पुनः साबित कर दिया है की मुसलमानों के प्रति संघ की सोच सर्व धर्म समभाव वाली रही है और संघ देश के मुसलमानों को सम्पूर्ण हिन्दू समाज के ही एक अंग के रूप में मानता है । आगे बढ़ने से पूर्व आपको यह जान लेना बेहद आवश्यक है की संघ प्रमुख ने अपने ताजा सम्बोधन में आखिर क्या कहा ।
दरअसल, भागवत ने रविवार को गाजियाबाद में राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के कार्यक्रम में एक किताब के लोकार्पण के दौरान कहा था कि यदि कोई हिंदू कहता है कि मुसलमान यहां नहीं रह सकता है, तो वह हिंदू नहीं है। गाय एक पवित्र जानवर है, लेकिन जो इसके नाम पर दूसरों को मार रहे हैं, वो हिंदुत्व के खिलाफ हैं। ऐसे मामलों में कानून को अपना काम करना चाहिए। उन्होंने कहा था कि सभी भारतीयों का DNA एक है, चाहे वो किसी भी धर्म का हो।
संघ प्रमुख ने गाजियाबाद में पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के सलाहकार रहे डॉ. ख्वाजा इफ्तिखार की किताब ‘वैचारिक समन्वय-एक व्यावहारिक पहल’ का विमोचन कर रहे थे । इस किताब में अयोध्या-बाबरी विवाद पर बड़ा खुलासा किया गया है।
अब आपको यह जान लेना भी बहुत जरूरी है कि इस बयान ने कट्टरपंथी मुल्ला मौलवी और दिग्विजयसिंह जैसे नेताओं की  नींद क्यों उड़ा दी व इसपर ओवैसी और दिग्विजय ने किस प्रकार अपनी खिसियाहट को निकाला । यह सम्पादकीय लिखे जाने से कुछ देर पूर्व ओवैसी ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर लिखा कि
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुखिया मोहन भागवत के हिंदुत्व और लिंचिंग से जुड़े बयान पर AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने पलटवार किया है। हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने सोमवार को सोशल मीडिया पर लिखा, ‘RSS के भागवत ने कहा कि लिंचिंग करने वाले हिंदुत्व विरोधी हैं। इन अपराधियों को गाय और भैंस में फर्क नहीं पता होगा, लेकिन कत्ल करने के लिए जुनैद, अखलाक, पहलू, रकबर, अलीमुद्दीन के नाम ही काफी थे। ये नफरत हिंदुत्व की देन है। इन मुजरिमों को हिंदुत्ववादी सरकार की पुश्त पनाही हासिल है।
उन्होंने लिखा, ‘कायरता, हिंसा और कत्ल करना गोडसे की हिंदुत्व वाली सोच का अटूट हिस्सा है। मुसलमानो की लिंचिंग भी इसी सोच का नतीजा है।’ उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री के हाथों अलीमुद्दीन के कातिलों की गुलपोशी हो जाती है। अखलाक के हत्यारों की लाश पर तिरंगा लगाया जाता है। आसिफ को मारने वालों के समर्थन में महापंचायत बुलाई जाती है। जहां भाजपा का प्रवक्ता पूछता है कि क्या हम मर्डर भी नहीं कर सकते?
चलिए दिग्विजयसिंह को लगी मिर्ची के कारण  वे जो कुछ बोले उसे भी जान लीजिए दिग्विजयसिंह ने कहा है कि 
मोहन भागवत जी यह विचार क्या आप अपने शिष्यों, प्रचारकों, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल कार्यकर्ताओं को भी देंगे? क्या यह शिक्षा आप मोदी-शाह जी और भाजपा मुख्यमंत्री को भी देंगे? यदि आप अपने व्यक्त किए गए विचारों के प्रति ईमानदार हैं तो भाजपा में वे सब नेता जिन्होंने निर्दोष मुसलमानों को प्रताड़ित किया है उन्हें उनके पदों से तत्काल हटाने का निर्देश दें।’
इन दोनों बयानों का आंकलन किया जाए तो साफ हो जाता है कि ओवैसी और दिग्विजयसिंह जैसे नेताओं को देश में  हिन्दू मुस्लिम एकता व सर्वधर्म समभाव वाली कोई भी बात पसंद नहीं है। और पसंद हो भी कैसे क्योंकि इस प्रकार के नेताओं और उनके राजनीतिक दलों का सम्पूर्ण अधिष्ठान हिन्दू मुसलमान के बीच नफरत पैदा करना ही रहा है। यह कतई नहीं चाहते इस देश में हिन्दू मुस्लिम एकता का नारा बुलंद हो ,इन्हें राष्ट्रीय मुस्लिम मंच आरएसएस जैसे संगठनों के क्रिया कलाप इस कारण पसंद नहीं क्यों कि इनका उद्देश्य तो हिन्दू मुसलमान के बीच रक्त रंजित खाई पैदा करके अपनी राजनीतिक रोटियां सेकना है। आजादी के समय से ही नेहरू और जिन्ना जैसे नेता कुर्सी के लिये यही सब करते रहे हैं। इन्ही की गलत सोच के कारण देश विभाजित हुआ ,कश्मीर जैसी समस्या पैदा हुई। आज ओवैसी और दिग्विजयसिंह जैसे कट्टरपंथी नेता उसी सोच के साथ काम कर रहे हैं। यही वजह है की जब हिन्दू मुस्लिम एकता की बात सामने आती है ये जहर उगलना शुरू कर देते हैं। बदले हुए परिवेश में संघ प्रमुख की बात सौ प्रतिशत सही है लिंचिंग कोई भी करे हिन्दू या मुसलमान वह सही नहीं कही जा सकती जो ऐसा करता है उसके खिलाफ कानून को अपना काम करना ही चाहिए। इस बात पर गड़े मुर्दे निकालना और केवल यह सिद्द करना की दोषी केवल बहुसंख्यक समाज है सरासर गलत है और बेहद शर्मनाक भी।
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