मध्यप्रदेश के ग्वालियर घराने में जन्में ज्योतिरादित्त सिधिंया ने जब कांग्रेस पार्टी को अलविदा कहा था उसी समय उनका केन्द्र सरकार में मंत्री बनना तय था। आज मोदी मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कैबिनेट मंत्री की शपथ
ले ली।सिंधिया के कांग्रेस छोडते ही मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार में शामिल 20 विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया था जिस कारण मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार धराशायी हुई थी और मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार की पुनः वापसी हुई थी। आइए जानते हैं मध्यप्रदेश की राजनीति में भूचाल मचाने वाले ज्योतिरादित्य सिधिंया कितनी संपत्ति के मालिक हैं और रूबरू होते हैं राजघराने से ताल्लुक रखने वाले सिंधिया केआलीशान पैलैस से जो हैं उनका घर
बता दें सिंधिया की दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया जनसंघ से लेकर भाजपा तक की संस्थापक नेता रहीं साथ ही उनकी बुआ वसुंधरा राजे सिंधिया भाजपा से राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री रहीं और उनके पिता स्व. माधवराव सिंधिया कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे। माधवराव सिंधिया के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया 2019 के लोकसभा चुनाव में मध्यप्रदेश के सबसे अमीर प्रत्याशी थे। सिंधिया राजवंश की संपत्ति कितनी है, इसका अंदाजा लगाना तो मुश्किल है, लेकिन इसे 40 हजार करोड़ रुपए का बताया जाता है। सिंधिया ने 2014 की लोकसभा के दौरान जो हलफनामा दिया था, उसके मुताबिक उनके पास 32 करोड़ 64 लाख 412 रुपये संपत्ति है। उनके पास एक पैतृक बीएमडब्ल्यू कार भी है।
ज्योतिरादित्य की संपत्ति और उनकी जीवनशैली सपनों जैसी ही है। वह 400 कमरे वाले शाही महल में रहते हैं। सन 1874 में बनकर तैयार हुए इस राज महल का नाम जयविलास पैलेस है। आपको बता दे, कि 400 कमरे वाले शाही महल में 40 कमरों में म्यूजियम, जबकि महल की सीलिंग पर सोने जड़े हुए हैं। इस भवन की कीमत करीब दो सौ मिलियन डॉलर बताई जाती है। सिंधिया का ग्वालियर का जय विलास पैलेस 1,240,771 वर्ग फीट क्षेत्र में महल फैला हुआ है। इस महल का वैभव पूरे भारत में मशहूर है। इसकी दीवारों पर सोने से पेंट किया गया है। इसकी खासियत ऐसी हैं कि आप भी दांतों तले अंगुली चबा जाएं। राजसी वैभव से भरे इस महल में भोजन परोसने के लिए चांदी से बनी ट्रेन चलती है। 3500 किलों चांदी के झूमर है
इस महल का निर्माण 1874 में जीवाजी राव सिंधिया ने करवाया था। लेफ्टिनेंट कर्नल सर माइकल फिलोज ने डिजाइन तैयार किया गया था। महल की छतों पर सोना लगा है। पैलेस में रायल दरबार हॉल है, जो 100 फीट लंबा-50 फीट चौड़ा और 41 फीट ऊंचा है। इसकी छत पर 140 सालों से 3500 किलो के दो झूमर टंगे हैं। इसे टांगने के लिए इंजीनियरों ने छत पर 10 हाथियों को 7 दिनों तक खड़ा रखा था इन झूमरों को बेल्जियम के कारीगरों ने बनाया था। पैलेस के डाइनिंग हॉल में चांदी की ट्रेन है जो खाना परोसने के काम आती है।माना जाता है कि जिस वक्त इस महल का निर्माण किया गया था, तब इसकी कीमत 1 करोड़ थी, लेकिन आज इस विशाल और आकर्षक महल की कीमत अरबों में है।
। पिता माधवराज सिंधिया की अचानक मौत के बाद राजनीति में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया का कैसा रहा अब तक का सियासी सफर आइए जानते हैं….
बता दें ग्वालियर के सिंधिया परिवार की सियासत कांग्रेस से शुरू होकर जनसंघ पहुंची थी। वर्तमान में ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित बाकी सब बीजेपी में हैं। राजमाता विजयाराजे सिंधिया चाहती थीं कि उनका पूरा परिवार बीजेपी में ही रहे। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी कांग्रेस से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में लौट कर अपनी दादी का सपना पूरा किया ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस से चार बार सांसद और केंद्रीय मंत्री भी रहे
सिंधिया राजघराने से आने वाले 46 वर्षीय ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश के गुना संसदीय सीट से पूर्व लोकसभा सांसद थे। देश के युवा नेताओं में से एक सिंधिया सियासी माहौल में पले बढ़े हैं। उनके पिता और कांग्रेस के दिग्गज नेता माधवराव सिंधिया के आकस्मिक निधन के बाद ज्योतिरादित्य सिर्फ 31 साल की उम्र में राजनीति में उतरे। 2002 में गुना संसदीय उप चुनाव में वह भारी अंतर से जीतकर संसद पहुंचे। गुना संसदीय से सीट से वह लगातार चौथी बार सांसद बने थे।
सिंधिया का नाम आज देश के महत्वपूर्ण लोगों में लिया जाता हैं। सिंधिया का जन्म 1 जनवरी1971 को मुम्बई के समुद्र महल में हुआ था। उनकी मां नाम माधवी राजे ज्योतिरादित्य की एक बहन चित्रांगदा है जो उनसे तीन साल बड़ी हैं। उनका नाम देवता ज्योतिबा के नाम पर रखा गया हैं। ज्योतिरादित्य के जन्म के बाद ग्वालियर में महीनों जश्न मनाया गया था क्योंकि उनके जन्म के बाद ही ग्वालियर राजघराने को उनका वारिस मिला था।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय में सिंधिया ने की है पढ़ाई
उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र का अध्ययन किया और 1993 में स्नातक किया। 2001 में, उन्होंने स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने अमेरिका में ही साढ़े चार साल लिंच, संयुक्त राष्ट्र, न्यूयॉर्क और मार्गेन स्टेनले में काम का अनुभव लिया। सिंधिया मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं।यूपीए एक में मनमोहन सिंह कैबिनेट में सिंधिया को पहली बार 2008 में सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री बनाया गया। जब मनमोहन सिंह दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने तो उन्हें राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का दर्जा दिया गया।
सिंधिया की शादी बडौदा के गायकवाड़ घराने की राजकुमारी प्रियदर्शनी राजे से 12 दिसंबर 1994 को हुई थी। प्रियदर्शनी राजे के पिता कुंवर संग्राम सिंह के तीसरे बेटे थे और उनकी मां नेपाल राजघराने से ताल्लु क रखती हैं। उनकी पत्नी प्रियदर्शनी राजे भी बहुत खास है और उन्हें विश्व की टॉप 50 ब्यूटीफुल वीमंस में शामिल किया गया है। सिंधिया के दो बच्चे हैं जिनमे एक बेटा महा आर्यमण और बेटी अनन्याराजे है।
2019 में पहली बार चुनाव में मिली थी हार
बता दें 2001 में एक हादसे में माधवराव सिंधिया की मौत हो गई तो ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने पिता की विरासत संभालते रहे और कांग्रेस के मजबूत नेता बने रहे। ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिक दल के 18 वर्षों तक सदस्य रहें और 2014 तक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह प्रशासन के कैबिनेट में ‘स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री’ रहे। वे मध्य प्रदेश में गुना निर्वाचन क्षेत्र के मौजूदा सांसद रहे। वे लगातार तीन कार्यकालों तक इस सीट पर बने रहे। 2002 में पहली जीत के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया कभी चुनाव नहीं हारे थे लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें करारा झटका लगा। कभी उनके ही सहयोगी रहे कृष्ण पाल सिंह यादव ने ही सिंधिया को हरा दिया।
सिंधिया की दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने ग्वालियर पर राज करते हुए 1957 में कांग्रेस से अपनी राजनीति की शुरुआत की। वह गुना लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं। सिर्फ 10 साल में ही उनका मोहभंग हो गया और 1967 में वह जनसंघ में चली गईं। राजे सिंधिया की बदौलत ग्वालियर क्षेत्र में जनसंघ मजबूत हुआ और 1971 में इंदिरा गांधी की लहर के बावजूद जनसंघ यहां की तीन सीटें जीतने में कामयाब रहा। खुद विजयाराजे सिंधिया भिंड से, अटल बिहारी वाजपेयी ग्वालियर से और विजय राजे सिंधिया के बेटे और ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया गुना से सांसद बने।
पिता माधवराव सिंधिया ने मां से बगावत कर कांग्रेस किया था ज्वाइन
ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव सिंधिया महज 26 साल की उम्र में सांसद चुने गए थे लेकिन वह बहुत दिन तक जनसंघ में नहीं रुके। माधव राव सिंधिया अपने मां-पिता के इकलौते बेटे थे। वह चार बहनों के बीच अपने माता-पिता की तीसरी संतान थे। माधवराव सिंधिया सिर्फ 26 साल की उम्र में सांसद चुने गए थे, लेकिन वह बहुत दिन तक जनसंघ में नहीं रुके। 1977 में आपातकाल के बाद उनके रास्ते जनसंघ और अपनी मां विजयराजे सिंधिया से अलग हो गए। 1980 में माधवराव सिंधिया ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीतकर केंद्रीय मंत्री भी बने। उनका विमान हादसे में 2001 में निधन हो गया था
ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्यप्रदेश के नेता हैं। ग्वालियर चंबल संभाग में मजबूत पकड़ रखते हैं। राजघराने से ताल्लुक रखने व उसके एकमात्र वारिस होने की वजह से जनता उन्हें बेहद पसंद करती है।









