मध्यप्रदेश की प्रतिष्ठित ग्वालियर लोकसभा सीट पर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के उम्मीदवार को लेकर मंगलवार को भी सस्पेंस बरकरार रहने से प्रचार गति पकड़ता दिखाई नहीं दिया, दोनों ही दलों में जितने मुंह उतनी ही बातों का दौर चल पड़ा है। उधर दूसरी ओर भिंड लोकसभा सीट पर प्रत्याशी घोषित करने में जल्दबाजी कर बैठी भाजपा को अब एक पूर्व सांसद और पूर्व विधायक के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है हालांकि यह आक्रोश फिलहाल बगावत में तब्दील होता नहीं दिखाई दे रहा है और पार्टी डैमेज कंट्रोल करने में जुटी हुई है।
ग्वालियर लोकसभा पर महल का प्रभाव साफ तौर पर महसूस किया जा रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों में ही एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जो यह चाहता है कि उनका प्रत्याशी महल से जुड़ा हुआ हो। उल्लेखनीय है कि जहां कांग्रेस में महल से ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी राजे की प्रत्याशी के रूप में डिमांड है ।वहीं भाजपा के लोग यशोधरा राजे सिंधिया को प्रत्याशी घोषित करने की मांग कर रहे हैं। जहां तक दोनों दलों के रणनीतिकारों की बात है उनके अपने अपने तर्क है। सूत्रों के मुताबिक कमलनाथ के कहने पर भोपाल जैसी कठिन सीट पर लड़ने को मजबूर होने वाले दिग्विजय सिंह अब इस बात पर अड़े हैं कि कठिन सीट का फार्मूला ज्योतिरादित्य पर भी लागू किया जाए यही वजह है कि ज्योतिरादित्य को इंदौर से खड़ा करने की चर्चा है। यह बात ज्योतिरादित्य मानने तैयार नहीं हैं वे न तो अपनी गुना सीट छोड़ना चाहते हैं और न ही अपनी पत्नी प्रियदर्शिनी को चुनाव में उतारने के पक्ष में हैं इन सब स्थितियों के कारण ग्वालियर पर पेच फंस गया है।
उधर भाजपा में यशोधरा राजे को लेकर एक बड़ा पेच यह फंस रहा है कि पार्टी किसी विधायक को लोकसभा टिकट देने के खिलाफ है। हालांकि शिवराज सिंह के मामले में पार्टी अपना निर्णय बदलने के मूड में दिखाई दे रही है अगर ऐसा होता है तो यशोधरा के लिए रस्ता खुल सकता है। दूसरा बड़ा पेच यह है कि महल से कभी भी दो प्रत्याशी आमने सामने नहीं आते है। यदि कांग्रेस ने महल से प्रत्याशी घोषित करने में पहल कर दी तो फिर यशोधरा सामने नहीं आएंगी। यह तभी सम्भव है जब या तो भाजपा यशोधरा को प्रत्याशी घोषित करने की पहल करे या फिर कांग्रेस से महल की जगह कोई बाहर का प्रत्याशी घोषित किया जाए।
दोनों ही दलों में महल के अतिरिक्त जो नाम दौड़ में हैं उनमें भाजपा से विवेक शेजवलकर, मायासिंह, अनूप मिश्रा तथा कांग्रेस से अशोक सिंह, मोहन राठौड़, रामबरन सिंह आदि प्रमुख हैं।
उधर भाजपा में भिंड सीट पर सन्ध्या राय को प्रत्याशी घोषित किये जाने के बाद इस दौड़ में आगे चल रहे अशोक अर्गल के अब मुंह फुलाकर नाराज होने की खबरें आ रही हैं वे कई बार के सांसद रह चुके है और संसद में नोट के बदले वोट कांड के हीरो रहे है,उन्हें पूरी उम्मीद थी की पार्टी उन्हें भिंड की आरक्क्छित सीट से टिकट देगी लेकिन इस नहीं हुआ। अशोक अर्गल वर्तमान में मुरैना से महापौर है यदि उनकी नारजी और बढ़ती है तो वे मुरैना में केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र तोमर के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। उधर भिंड से टिकिट के दावेदार भांडेर के पूर्व विधायक घनश्याम पिरौनिया के भी नाराज होने की खबरें मिल रही हैं देखना होगा पार्टी के नीतिनिर्धारक कितना डैमेज कंट्रोल कर पाते हैं।