Homeसम्पादकीयथोड़ा और बड़ा दिल करिए मुख्यमंत्री जी, होगी बड़ी मेहरबानी

थोड़ा और बड़ा दिल करिए मुख्यमंत्री जी, होगी बड़ी मेहरबानी

 

वर्ल्ड प्रेस फ़ीडम डे पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने मान्यता प्राप्त पत्रकारों को प्रथम पंक्ति का कोरोना योद्धा की सूची में शामिल करके एक बड़ी राहत प्रदान की है।  जब पूरी पत्रकार बिरादरी  कोरोना के कालकवलित कर देने वाले दुष्परिणामों से जूझ रही है  दूसरी ओर मीडिया संस्थानों की अनदेखी के चलते बेरोजगारी और अंधकारमय भविष्य की चिंता से भी बेहाल है  ऐसे समय मध्यप्रदेश सरकार ने यह घोषणा करके अधिमान्य पत्रकारों के बढ़ते मानसिक अवसाद को थोड़ा कम जरूर किया है। इस घोषणा से उन्हें कितना आर्थिक संबल मिलेगा यह तो आनेवाला वक्त ही बताएगा।

यह घोषणा करते समय शिवराज सरकार को थोड़ा और बड़ा दिल दिखाने की आवश्यकता से इंकार नहीं किया जा सकता लिखने में कोई संकोच नहीं होना चाहिये की मुख्यमंत्री ने इसमें पत्रकारों के साथ थोड़ी कंजूसी कर दी है।  यदि  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने बिहार और उड़ीसा के मुख्यमंत्रियों की तरह इस घोषणा में सभी पत्रकारों को शामिल कर लिया होता तो पूरी की पूरी पत्रकार बिरादरी को थोड़ा सुकून मिल जाता। निश्चित ही सभी पत्रकारों को फ्रंट लाइन वर्कर की सूची में शामिल करना थोड़ा कठिन कार्य अवश्य कहा जा सकता है , इसके लिए क्या मापदंड हों यह परेशानी का विषय हो सकता है लेकिन यह असम्भव तो कतई नहीं कहा जा सकता

।  इस समस्या का समाधान बड़ी सरलता के साथ किया जा सकता है। 

सबसे अच्छा व सरल तरीका तो यह हो सकता है की  जो पत्रकार सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची में नहीं हैं  उन्हें जिला जनसंपर्क अधिकारी द्वारा सत्यापित करके सूची तैयार की जा सकती है। अधिमान्यता व उसके  नवीनीकरण के समय भी शासन ने यही नियम तय कर रखा है। 

एक अन्य प्रक्रिया यह भी हो सकती है की जो पत्रकार स्वास्थ्य बीमा योजना में पंजीकृत हैं या फिर इसके लिए जो योग्यता है उन्हें फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स का भी लाभ मिले।  

इसके साथ ही बिहार सरकार की दर्ज पर  इसमें प्रिंट मीडिया के साथ-साथ इलेक्ट्रानिक व वेब मीडिया के पत्रकारों को भी फ्रंटलाइन वर्कर माना 

जाए यह श्रेणी तय करने की जिम्मेदारी भी स्थानीय जनसम्पर्क विभाग को  दी जा सकती है।

जहांतक अधिमान्य पत्रकारों को ही फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स मानने का सवाल है तो यह सच है की वे राज्य सरकार के सूचीबद्ध पत्रकार हैं और वे पत्रकारों के लिए घोषित हर कल्याणकारी योजना के प्रथम हकदार भी हैं। लेकिन यह भी उतना ही सच है की समय समय पर अधिमान्य पत्रकारों की सूची को लेकर तमाम आश्चर्यजनक खुलासे भी होते रहे हैं। उस बारे में फिलहाल लिखने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में कोरोना फ्रंटलाइन वारियर्स का मापदंड केवल प्रदेश सरकार की अधिमान्यता सूची को ही मान लेना सम्पूर्ण पत्रकारों के साथ किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। यह इस दृष्टि से भी सही नहीं है है की पिछले एक वर्ष से भी अधिक समय के कोरोनकाल में तमाम मीडिया संस्थानों ने पत्रकारों की बड़े पैमाने पर छटनी करदी,तमाम पत्रकारों की नोकरी भी चली गई कई संस्थानों ने अपने दफ्तर बंद कर दिए या फिर ब्यूरो की तर्ज पर सिमट गए। ऐसे हालात में कलम के धनी तमाम पत्रकारों की नोकरी तो गई ही अधिमान्यता भी चली गई बावजूद इसके वे कहीं न कहीं पत्रकारिता कर रहे हैं। 

बिहार में सभी पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित

बिहार में मान्यता प्राप्त पत्रकारों के साथ-साथ गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों को भी फ्रंटलाइन वर्कर की श्रेणी में शामिल कर सरकार प्राथमिकता के आधार पर उनका टीकाकरण कराएगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को इस आशय का निर्देश दिया, जो पत्रकार सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची में नहीं हैं, उन्हें जिला जनसंपर्क अधिकारी द्वारा सत्यापित किए जाने के बाद टीका लग सकेगा। सभी चिह्नित पत्रकारों को प्राथमिकता के आधार पर कोविड-19 का टीकाकरण कराया जाएगा। प्रिंट मीडिया के साथ-साथ इलेक्ट्रानिक व वेब मीडिया के पत्रकारों को भी फ्रंटलाइन वर्कर माना जाएगा।

ओडिशा में पत्रकार भी फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स घोषित

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पत्रकारों को भी फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स घोषित किया है। इस घोषणा से गोपबंधु पत्रकार स्वास्थ्य योजना में शामिल राज्य के छह हजार 944 पत्रकारों को इसका लाभ मिलेगा। योजना में पत्रकारों को दो लाख का स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिलेगा। कोविड के समय कार्यरत किसी भी पत्रकार की मृत्यु होने पर परिवार को 15 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा मुख्यमंत्री ने की है।

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