ग्वालियर। जल, जंगल और जमीन के हक़ की लड़ाई को लेकर 27 हजार लोगों के आंदोलन को मध्य प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान खत्म कराने में नाकामयाब रहे। ग्वालियर पहुंचे सीएम शिवराज सिंह चौहान ने एकता परिषद के मंच से हजारों आदिवासियों के हित में प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे काम गिनाये । लेकिन एकता परिषद से साफ कर दिया कि उनकी लड़ाई किसी एक राज्य की नही है, इसलिए वे इस मसले में केंद्र सरकार का हस्तक्षेप चाहती है। तभी आदिवासी अपने घर लौटेगें। इसलिए वे वह 4 अक्टूबर को ग्वालियर से दिल्ली के लिए कूच करेंगे।
अपने अधिकारों को लेकर मध्यप्रदेश , छत्तीसगढ़, राजस्थान, केरल, झारखंड , बिहार सहित लगभग 15 राज्यों से ग्वालियर में जुटे 27 हजारों भूमिहीनों को मनाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार को ग्वालियर पहुंचे । मुख्यमंत्री विमानतल से सीधे मेला मैदान पहुंचे और वहां पर डेरा डाले एकता परिषद के सत्याग्रहियों से मिले। परिषद की ओर से राजगोपाल पीवी ने उन्हें पहले ही आमंत्रण भेजा था। मुख्यमंत्री ने यहां पर प्रतिज्ञा लेते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के पास जमीन का एक टुकड़ा होगा और कोई भी भूमिहीन नहीं होगा। उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि गरीबी की समस्या को हल करने के दो तरीके हैं पहला गरीबों को सुविधाएं प्रदान करके दूसरा अपनी आय बढ़ाकर। मैं उन दोनों दिशाओं में प्रयास करूंगा।
एकता परिषद के बैनर तले देश भर के हजारों भूमिहीनों को इकट्ठा करने वाले परिषद के संस्थापक पी वी राजगोपाल ने कहा कि अपना हक पाने के लिए अपनी ताकत का एहसास कराना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से गरीब और वंचित वर्गों को उनका हक दिलाने की बातचीत चल रही है, अगर इन मांगों को नहीं माना जाता है तो इस वर्ग को आगामी चुनाव में अपनी ताकत दिखानी होगी। साथ ही ये साफ कर दिया है कि सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश को लेकर अपनी बात रखी है। लेकिन एकता परिषद के बैनर पर हजारों आदिवासी देश के अलग-अलग राज्यों से आएं है… इसलिए शिवराज सिंह चौहान की बात से काम नही चलेगा। केंद्र सरकार को कानून बनाना पड़ेगा। इसलिए सभी लो 4 अक्टबूर को दिल्ली के लिए कूच करेगें।
एकता परिषद के सत्याग्रहियों ने 4 अक्टूबर को दिल्ली के लिए कूच करने का ऐलान किया है। इससे माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव की बेला में बीजेपी मनाने की कोशिश करेंगी। साथ ही आदिवासियों ने अगले लोकसभा चुनाव में सरकार गिरा देने की भी धमकी दी है। ऐसे में अब सबकी निगाहें 6 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दौरे पर टिक गयी है। राहुल गांधी एकता परिषद के बैनर पर इकट्टा हुए हजारों आदिवासियों से मिलने के लिए मुरैना पहुंचेगें। उनके साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ भी रहेगें। कुल मिलाकर इस आंदोलन को राजनैतिक हवा देने के लिए विपक्षी भी मौजूदा सरकार को घेरने के लिए एकजुट हो गए हैं। ऐसे में देखना होगा कि वो कितने कामयाब होते है।