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ग्वालियर बना राजनीतिक वॉर सेंटर प्रभात झा के आने से दिलचस्प हुआ चुनावी द्वंद्व

ग्वालियर /मध्यप्रदेश में आगामी समय में 27 सीटों पर होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर  ग्वालियर वॉर सेंटर अर्थात राजनीतिक रण का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है की प्रदेश की 27 सीटों में जहां चुनाव होना है उनमें से 16 ग्वालियर अंचल से ही आती हैं।   ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की इन 16 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रचार-प्रसार के लिए ग्वालियर को मुख्य केंद्र बनाया है।  कांग्रेस पार्टी ने यहां चुनावी ‘वॉर रूम’ बनाकर उसकी जिम्मेदारी कांग्रेस नेता केके मिश्रा को सौंपी है। वहीं इसके जवाब में भाजपा ने  अपने फायर ब्रांड तेज तर्रार उपाध्यक्ष प्रभात झा को मैदान में उतारा है श्री झा की काबलियत केवल नेता की न होकर सफल पत्रकार और कुशल संगठक के साथ साथ अंचल खासकर ग्वालियर चम्बल में कार्यकर्ताओं की बारीक समझ रखने वाली होने से अब चुनावी द्वंद्व दिलचस्प  होता दिखाई दे रहा है। जैसी की जानकारी आ रही है उसके मुताबिक भाजपा ने अपने अनुभवी एवं वरिष्ठ नेता को ग्वालियर में चुनावी। कमान संभालने यहां दो दिन पहले भेज दिया है वे उपचुनाव तक वहीं रहेंगे और सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों से प्रचार-प्रसार का जिम्मा संभालेंगे। सूत्रों के मुताबिक ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने से प्रदेश में 22 विधानसभा सीटों के उपचुनाव होने हैं। दो सीटें विधायकों के निधन की वजह से रिक्त हैं तो तीन सीट सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस विधायकों के इस्तीफा देने के कारण खाली हुई हैं।मध्य प्रदेश में कुल 27 विधानसभा सीटों के उपचुनाव होने हैं। इनमें 16 सीटें ग्वालियर-चंबल संभाग में आती हैं। जाहिर है कि कांग्रेस इन सीटों को जीतकर भाजपा और सिंधिया को जवाब देना चाहेगी, इसलिए पार्टी ने ग्वालियर को चुनावी वॉर रूम बनाया है।   उधर भाजपा किसी भी कीमत पर कांग्रेस को यहां से पुनः पैर न जमाने देने  की रणनीति पर काम करती दिख रही है एक तरफ 22 अगस्त को महासदस्यता अभियान के द्वारा अंचल के हजारों सिंधिया समर्थकों को भाजपा जॉइन कराई जा रही है तो दूसरी और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा को भी यहां डेरा डालने को कहा गया है इतना ही नहीं 22 तारीख को मध्यप्रदेश में सत्ता व संगठन के सभी शीर्ष नेता यहां आ रहे हैं मतलब साफ है भाजपा चुनाव से पहले ही कांग्रेस नेतृत्व को मनोवैज्ञानिक शिकस्त देकर बचे खुचे कार्यकर्ताओं को डिप्रेशन में ले जाने की रणनीति पर काम कर रही है

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