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मध्यप्रदेश भाजपा की हार पर महामंथन प्रदेश सहसंगठन मंत्री अतुलराय को हटाकर संघ में वापसी

विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद आने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महामंथन में जुट गए हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति मध्यप्रदेश के इंदौर में विचार विमर्श चरम पर है । सूत्रों के अनुसार फिलहाल अंदर से जो खबर छनकर बाहर आ रही है वह यह है कि भारतीय जनता पार्टी में विधानसभा चुनाव के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले  प्रान्त सहसंगठन मंत्री अतुल राय को उनके पद से हटाकर संघ में वापसी कर दी गई है जो जानकारी मिली है उसके अनुसार श्री राय को संघ की मध्यभारत प्रान्त की कार्यकारिणी का सदस्य बना दिया गया है। हालांकि कहा जा रहा है कि खुद अतुल राय ने पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल को पत्र लिखकर हटने और संघ में भेजने की मंशा जाहिर की थी।उल्लेखनीय है कि ग्वालियर मूल के अतुल राय राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में लगभग 18 वर्ष पूर्व  प्रचारक बने थे। राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते वो भाजपा में आए। आते ही उन्हे महाकौशल का संगठन मंत्री बना दिया था। इस नियुक्ति के साथ ही अतुल राय के साथ विवाद जुड़ गए थे। भाजपा नेताओं ने उनकी नियुक्ति पर ही प्रश्न उठाए थे। आरोप था कि वरिष्ठ की अनदेखी कर जूनियर को कुर्सी सौंपी गई है। हालात इतने बिगड़े कि अतुल राय का परिचय कराने के लिए खुद सुहास भगत को जबलपुर जाना पड़ा। लेकिन इसके बाद भी संगठन में उपजा असंतोष थमा नहीं। आरएसएस से आए वरिष्ठ संगठन मंत्री भी अतुल राय की नियुक्ति से नाराज थे। रीवा के वरिष्ठ संगठन मंत्री चन्द्रशेखर राय संगठन नेताओं की समझाइश के बाद भी नहीं माने  और अपना बोरिया बिस्तर समेट कर रीवा से चले गए हैं।

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अतुलराय की इस तरह से वापसी के पीछे मुख्य कारण विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिली हार और संगठन में समन्वय की कमी व बढ़ता असन्तोष और नियंत्रित न कर पाना मुख्य कारण माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि अभी तो यह शुरुआत है आने वाले समय में  संघ से भाजपा में जाकर कार्य कर रहे कुछ और बड़े चेहरों पर गाज गिर सकती है।

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