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” माल न राखे आपनो चोरन गाली दे”

प्रवीण दुबे

मध्यप्रदेश के वर्तमान सियासी घटनाक्रम पर एक पुरानी कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है यह कहावत कुछ इस प्रकार है ” माल न राखे आपनो चोरन गाली दे” पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह भाजपा पर कांग्रेस के विधायकों की खरीद फरोख्त को लेकर खासे हमलावर हैं। उन्होंने भाजपा के कुछ प्रदेश स्तरीय नेताओं पर कांग्रेस विधायकों को करोड़ों का ऑफर दिए जाने का आरोप लगाया है। हालात यहां तक जा पहुंचे हैं की दिग्विजयसिंह ,उनके पुत्र राजवर्धन सिंह व कुछ निकट सहयोगियों को पूरी रात भोपाल से लेकर दिल्ली व हरियाणा के होटलों की निगरानी करना पड़ रही है। निःसन्देह यह कांग्रेस के लिए चिन्ता का विषय है। लेकिन इस खरीद फरोख्त के लिए सीधे भाजपा को दोषी ठहराना आखिर कहां तक उचित है ? कांग्रेस विधायकों का भाजपा नेताओं के सम्पर्क में आना फिर सौदेबाजी की डील पर चर्चा और हरियाणा के होटल में भाजपा नेताओं के साथ एकत्रित होना क्या कांग्रेस के भीतर फूट को उजागर नहीं करता है ? क्या इससे यह सिद्ध नहीं होता की कांग्रेस के अपने विधायक कहीं न कहीं प्रदेश सरकार के अंकुश से बाहर होकर बेलगाम हो चले है और इसका फायदा ताक में बैठी भाजपा उठा रही है। कितनी हास्यास्पद बात है की दिग्विजयसिंह भाजपा पर कांग्रेस विधायकों को बंधक बनाने का आरोप लगा रहे हैं यदि यह बात सही है तो वे इसके खिलाफ कानून का सहारा क्यों नही लेते,पुलिस से सहायता की गुहार क्यों नहीं लगाते ? इसको लेकर उनके भीतर हिचकिचाहट है क्यों की वे भली प्रकार जानते है की कांग्रेस के भीतर ही ढोल में पोल है। सबसे बड़ा सवाल है की यदि कांग्रेस के दस से लेकर चौदह विधायक भाजपा के सम्पर्क में हैं और वह डील के लिए प्रदेश के बाहर एक होटल तक जा पहुंचे हैं तो कब तक दिग्विजयसिंह जैसे नेता इनकी चौकीदारी करेंगे ? यदि इन विधायकों के मन में  पाप है तो आज नहीं तो कल यह भाजपा के साथ खड़े नजर आएंगे कई प्रदेशो में ऐसा देखने को भी मिला है और कांग्रेस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है। अतः सबसे बड़ी जरूरत अपना घर सुधारने की है। यहां कहने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए की वर्तमान समय में कांग्रेस के भीतर सर्वाधिक गुटबाजी कहीं दिखाई देती है तो वह मध्यप्रदेश में ही है। सर्वविदित है की मध्यप्रदेश में कांग्रेस तीन बड़े नेताओं दिग्विजयसिंह, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के खेमों में बंटी हुई है। प्रदेश के सभी विधायक भी इसी खेमेबंदी का शिकार हैं।  इन हालातों में एक गुट दूसरे को कमजोर करने में  जुटा दिखाई देता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसा बड़ा नेता अपनी अनदेखी से नाराज है चर्चा तो यहां तक है की श्री सिंधिया अपने पिता की तर्ज पर अलग राजनीतिक दल बनाने की तैयारी में हैं, इसी प्रकार अर्जुनसिंह के बेटे राहुल सिंह,केपी सिंह जैसे कई नेता नाराज हैं। इन परिस्थितियों में भाजपा के लिए जोड़तोड़ का उपयुक्त माहौल है। इसके लिए सबसे पहले कांग्रेस को अपने घर के वातावरण को सुधारने की आवश्यकता है न की भाजपा पर तंज कसने की।

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