कहा समन्वय, सह अस्तित्व, कर्तव्य पालन और नैतिक मूल्य अपनाने से होगा समस्याओं का समाधान
ग्वालियर 25 सितंबर 2026/समाज विभिन्न घटकों से बनता है। विविधता होने से समस्याओं का होना स्वाभाविक है। लेकिन हर समस्या का समाधान भी है। बस उसके लिए सही प्रयास चाहिए। समन्वय, सह अस्तित्व, कर्तव्य पालन और नैतिक मूल्य अपनाने से ही समस्याओं का समाधान होगा। आज सम्मान, सुरक्षा, सह भागिता और चिंतन की जरूरत है।
यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भैया जी जोशी ने शुक्रवार को राष्ट्रोत्थान न्यास की ज्ञान प्रबोधिनी व्याख्यान माला में मुख्य वक्ता की आसंदी से कही।
सांस्कृतिक मूल्यों की संरक्षक एवं संवर्धक मातृशक्ति विषय पर एलएनआईपीई के रवीन्द्र नाथ टैगोर सभागार में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ग्वालियर विभाग संघचालक प्रहलाद सबनानी एवं राष्ट्रोत्थान न्यास के अध्यक्ष डॉ.जगजीत सिंह नामधारी भी मंचासीन रहे।
मुख्य वक्ता श्री जोशी ने कहा कि जिस तरह शरीर विभिन्न अंगों से बना है और सभी का महत्व है। इसी तरह समाज भी विभिन्न घटकों से बना है। समरसता से ही समाज और राष्ट्र का भला होगा। उन्होंने कहा कि स्त्री हो या पुरुष सभी एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों एक-दूसरे के बिना अपूर्ण हैं। इसीलिए हमारे यहां मातृशक्ति को अर्धांगिनी माना गया है। पुरुषों के नाम भी लक्ष्मीनारायण, सीताराम, राधेश्याम रखे जाते हैं। जो परस्पर पूरक और समन्वय को दर्शाते हैं। मां पालन करती है तो पिता पोषण करता है। समाज जीवन सह अस्तित्व से चलता है। श्री जोशी ने समानता और एकरूपता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि मातृशक्ति और पुरुष के स्वभाव में अंतर होता है, लेकिन दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों की भूमिका अलग होने के बाद भी महत्व समान है। उन्होंने कहा कि शोषण और भेदभाव मुक्त जीवन से ही समाज और राष्ट्र का चहुंमुखी विकास संभव है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह एक मछली मरने से पूरा तालाब गंदा हो जाता है, उसी तरह एक व्यक्ति के दूषित होने से समाज प्रभावित होता है। इसके लिए संस्कार, शिक्षा, श्रेष्ठ जीवन मूल्यों का होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर सभी लोग अपने कर्तव्य का सही से पालन करें तो कोई समस्या उत्पन्न ही नहीं हो सकती है। और अधिकार मांगने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों का परिचय माधवी सिंह तोमर ने दिया। स्वागत प्रियंका कुशवाह, सुमन सिकरवार ने किया। व्यक्तिगत गीत निधि मिश्रा ने प्रस्तुत किया। संचालन अंजलि भार्गव ने एवं आभार डॉ.जगजीत सिंह नामधारी ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन वंदेमातरम् के सामूहिक गान से हुआ।